
पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मिश्रा उपस्थित हुए।
जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मिश्रा उपस्थित हुए। उन्होंने मधुमेह रोग को लेकर जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि इससे सुरक्षित रहने का एकमात्र उपाय इंसुलिन ही है।
इस रोग से पीडि़त होने के बाद शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, जिसे बाहरी तौर पर इंजेक्शन व अन्य माध्यमों से लिया जा सकता है।
डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि मधुमेह रोग एक धोखेबाज बीमारी है, जो बहुत चुपके से शरीर में प्रवेश करता है। इसके बारे में लोगों को पता नहीं होता, तब वे इसके सामन्य लक्षणों से पहचान ही नहीं पाते। इसके लक्षण बताते हुए कहा कि लोगों को सामान्य चक्कर आना, हाथ पैरों में बार-बार झुनझुनी होना, आंखों की रौशनी प्रभावित होना है।
इन लक्षणों को लोग सामान्य कमजोरी समझते हैं, जबकि ऐसे लक्षण दिखने पर इंसान को डॉक्टर से सलाह लेकर मधुमेह की जांच करानी चाहिए। मधुमेह जिसे हम शक्कर या शुगर की बीमारी बतौर जानते हैं।
इस बीमारी से प्रभावित ज्यादातर लोग अपने दिनचर्या में जादा आराम तलबी होते हैं। इनके काम की प्रकृति बैठकर काम करने की होती है। इस बीमारी से बचने के लिए नियमित लोगों को कम से कम दो किलोमीटर पैदल चलना या आधा घंटा वर्कआउट करना जरुरी होता है। इस रोग से पीडि़त को भी लगातार पैदल चलना या एक्सरसाइज करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मधुमेह रोग कभी भी किसी को भी हो सकता है। इससे लिए लोगों को 40 साल की उम्र के बाद नियमित जांच कराते रहना चाहिए। वहीं जो लोग मधुमेह से पीडि़त हो गए हैं, उन्हें हर 15 दिनों में जांच कराना चाहिए।
क्या है इंसुलिन
डॉ. मिश्रा ने बताया कि मधुमेह रोग शरीर में इंसुलिन की कमी से होता है। शरीर के पेनक्रियाज नामक अंग इंसुलिन का निर्माण करता है। जब पेनक्रियाज को नुकसान पहुंंचता है, तब मधुमेह रोग होता है। मधुमेह रोग से पीडि़त होने पर पेनक्रियाज से इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, जिसके कारण शरीर में शक्कर की मात्रा बढ़ती जाती है।
इस स्थिति से निपटने पीडि़त को इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए मरीज को इंसुलिन लगाया जाता है, जबकि लोग इंसुलिन लगाने को लेकर कई भ्रांतियों के शिकार हैं। उन्होंने बताया कि मधुमेह रोगी को इंसुलिन लगाने से नहीं घबराना चाहिए। मधुमेह की बीमारी कीडनी, ह्रदय, आंखों व नसों को प्रभावित करती है।
बच्चों भी मधुमेह के शिकार
अनियमित खान-पान, मैदानी खेलों से दूर होने के कारण वर्तमान में बच्चे भी मधुमेह के शिकार हो रहे हैं। बच्चों को भी मधुमेह होने के कारण उनको ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि मधुमेह रोगी बच्चा भी अपना सामान्य जीवन यापन कर सकता है। डॉक्टर के बताए अनुसार सावधानी बरतने पर बच्चे में मधुमेह का स्तर सामान्य बना रह सकता है। रोगी को शरीर में मधुमेह का सामान्य स्तर बनाए रखने लगातार प्रयास करना चाहिए, जिससे वह एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सके।
Published on:
23 Mar 2018 08:09 pm

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