नवरात्रि पर्व पर मां शिरिष पाठ की छठा देखते ही बनती है, जहां स्थानीय अंचलों सहित दूर-दराज से श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन करने पहुंचते है। दंतकथा पर आधारित शिरिष पाठ में स्थापित मां की प्रतिमा के साथ शिरिष पेड़ की पूजा किए जाने का विधान प्राचीनकाल से हैं। यह कथा जिला मुख्यालय जांजगीर के पामगढ़ विकासखण्ड की समीपस्थ ग्राम डोंगाकोहरौद की हैं, जिसमें प्रचलित कथा के अनुसार नाव और महिला की कथा प्रचलित हैं। इस प्रचलित कथा में गर्भवती महिला का नाव से पार करने की कहानी हैं, जिसके अनुसार यात्री भरी नाव महानदी में पार कर रहा था, तभी नाव बीच मजधार में रूक गई, जिसका कारण नाव में सवार गर्भवती महिला की सवार होने की कहानी प्रचलित हैं।