
shivji ki nikli barat
बाबा कलेश्वरनाथ की नगरी पीथमपुर में रविवार को गाजे-बाजे के साथ शिवजी की बारात निकली। बारात से पहले मंदिर परिसर में सुबह से ही शिवभक्तों की भीड़ लगने लगी थी। देश भर के विभिन्न अखाड़ों से आए दो दर्जन नागा साधु बारात में शामिल हुए। दोपहर तीन बजे से चांपा के राजपुरोहित ने पंचमुखी शिवजी की विशेष पूजा शुरु की। चांपा के जमींदार परिवार के लोगों ने राजपुरोहित के साथ शिवजी की विशेष पूजा की। पंचमुखी शिवजी की विशेष पूजा १६ प्रकार से की गई। पहले निर्गुणी पूजा कराई गई, इसके बाद गुणी पूजा हुई। षोडसोपचार पूजा एक घंटे तक चली। जिसमें दूध, दही, शक्कर, मधुरस, चंदन, गंगा जल, सिंदूर, चावल, दुबी, भस्म, आंक, छतूरा व इत्र से पंचमुखी बाबा कलेश्वरनाथ की पूजा की गई। मंदिर के अंदर जहां पूजा चल रही थी वहीं बाहर नागा साधु अपने करतब दिखा रहे थे। इसके बाद नागा साधुओं ने भी पूजा की और बाबा कलेश्वरनाथ को चांदी की पालकी में सवार कर बारात निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ शिवजी की बारात जैसे ही मंदिर से निकली रंग गुलाल फिजां में उड़ाए गए। भगवान शिवजी की एक झलक पाने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। इलाहाबाद, द्वारिका, बद्रीनाथ, गुजरात और इलाहाबाद सहित विभिन्न अखाड़ों के नागा साधु शिवभक्ती में मस्त थे, जो पालकी के आगे करतब दिखाते चल रहे थे। हांथों में शस्त्र, त्रिशुल और लाठी लेकर करतब दिखाते नागा साधुओं को देखकर लोग दांतों तले अंगुलियां दबा लेते थे। भगवान शिव की एक झलक पाने लोग बेताब थे। पालकी के करीब पहुंचते ही लोग सिक्के और गुलाल फेंककर भगवान से आर्शीवाद ले रहे थे। कलेश्वरनाथ को मेला भ्रमण कराने के बाद बारात शाम ६ बजे नाव घाट पहुंची, जहां नागा साधुओं ने पुण्य सलिला हसदेव नदी में स्नान किया। नदी में भी नागा साधुओं ने करतब दिखाए और नदी तट पर गंगा पूजा करने के बाद बारात वापस मंदिर पहुंची। रंग पंचमी पर हर साल की तरह यहां दूर-दूर से करीब १५ से २० हजार शिवभक्त पहुंचे थे।
क्या है पुरानी मान्यता
पीथमपुर के बाबा कलेश्वरनाथ के संबंध में ऐसी मान्यता है कि यहां आने से उदर रोग और संतान से संबंधी समस्या का निराकरण हो जाता है। मंदिर के शिवलिंग की जलहरि से निकलते पानी को भक्त अपने साथ ले जाते हैं। जनश्रुति के अनुसार ओडिशा के जमींदार ने पेट रोग से मुक्ति पाने के लिए पीथमपुर की यात्रा की थी। बाद में उनको दो पुत्र और दो पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई। इसी के चलते कलेश्वरनाथ अंचवासियों के आस्था का क्रेंद्र हैं।
डेढ़ सौ साल से नागा साधु निकाल रहे बारात
बाबा कलेश्वरनाथ और मंदिर का इतिहास काफी रोचक है। यहां लगभग पिछले १०० सालों से नागा साधुओं की बारात निकलती आ रही है। मंदिर परिसर की दिवार में लगे शिलालेख के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कार्तिक सुदी २, संवत १७५५ को कराया गया था। बाद में मंदिर के जीर्णशीर्ण होने पर चांपा जमींदारों द्वारा समय- समय पर इसका नवनिर्माण कराया गया। शिवजी की बारात का सिलसिला यहां १९२० के दशक से शुरू हुआ। मंदिर में रंगपंचमी की पूजा तब से आज तक चांपा जमींदार परिवार के सदस्य ही करते आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार डेढ़ सौ साल पहले चांपा जमींदार परिवार के रामशरण सिंह के समय से यह परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पीथमपुर में स्वयंभू शिव ***** है। इसे गांव के एक परिवार ने सपने में देखने के बाद खुदाई करके निकलवाया। वहां जमींदारों द्वारा मंदिर बनवाकर कर वहां कलेश्वरनाथ की विधिवत स्थापना कराई। इसके बाद से ही हर साल रंग पंचमी पर यहां मेला लगता है और शिवजी की बारात निकलती है। शुरूआती दौर में इसका स्वरूप छोटा था लेकिन नागा साधुओं की जमात आने के बाद से इसका विस्तार होता गया।
पुलिस की थी चाक चौबंद व्यवस्था
मेले में भीड़भाड़ को लेकर पुलिस ने चाक चौबंद व्यवस्था की थी। मेले में ड्यूटी के लिए ९५ बल लगाए गए थे। पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर और मेला स्थल पर तैनात थे। इसके अलावा जांजगीर थाने का पूरा स्टाफ भीड़ का नियंत्रित करने दिन भर लगा रहा। सुबह से लेकर शाम तक हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने पुलिस को काफी मसक्कत करनी पड़ी।
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Published on:
12 Mar 2023 08:40 pm

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