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नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने नाटक में दिए संदेश

* नाट्य मंचन कर कृषि विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स ने दिया हेल्दी मैसेज  

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नारी सशक्तिकरण  को बढ़ावा देने नाटक में दिए संदेश

नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने नाटक में दिए संदेश

रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयीन युवा उत्सव एग्री युनिफेस्ट 2019-20 के आयोजन में तरह-तरह के आयोजन हो रहे हैं। मंगलवार को यहां कई तरह के नाटक और गीत संगीत सहित प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। नाट्य मंचन की बात करें तो कई नाटक हेल्दी मैसेज देने वाले थे। इसमें से पहला नाटक नारी सशक्तिकरण पर आधारित था। वहीं एक अन्य नाटक किसानों को उन्नत और जैविक खेती के लिए प्रेरित करता दिखा।

नारी सशक्तिकरण को लेकर हुए नाट्य मंचन की बात करें तो इसमें दिखाया गया कि किस तरह महिला को शादी के बाद ससुराल और बाहरी दुनिया से जूझना पड़ता है। इस नाटक में दिखाया गया कि एक लड़की अपने आंखों में भविष्य के ताने-बाने बुनकर बाबुल के घर से विदा होती है। पति के घर आने पर कुछ दिन तो सब ठीक रहता है, लेकिन बाद में उसे प्रताडऩा का शिकार होना पड़ता है। सास की प्रताडऩा से परेशान महिला के जीवन में एक और नया मोड़ तब आता है जब उसके पति की मौत हो जाती है और उसकी जगह नौकरी करने के लिए ससुराल की दहलीज पार करनी पड़ती है। ऑफिस में बॉस उस पर गंदी नजर डालता है तो वह ससुराल वालों से नौकरी न करने का प्रस्ताव रखती है। इससे नाराज होकर ससुराल वाले उसे उसकी बेटी सहित घर से निकाल देते है। इसके बाद महिला अपने पिता के घर आती है और सारी बात बताती है। पिता ने उसे कहा कि उसे अपनी लड़ाई खुद लडऩी होगी। पिता के दिए आत्मबल से महिला फिर नौकरी करने जाती है और बॉस की हरकतों का विरोध करते हुए उसके क्रियाकलापों को रिकार्ड कर पुलिस में शिकायत करती है। इसके बाद बॉस को जेल होती है और महिला की जिंदगी बेहतर हो जाती है।

रसायनिक हटाओ, जैविक को अपनाओ

इस मंच में कर्नाटक कृषि विश्वविद्यालय से आए विनोद कश्यप व उनकी टीम ने किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करने नाट्य मंचन किया। नाटक में दिखाया गया कि रसायनिक खेती से किस तरह से हानिकारक है। साथ ही यह भी दिखाया गया कि एक किसान अच्छी बारिश से जहां अच्छी फसल लेता है तो वहीं बेमौसम बारिश से किस तरह उसे हानि होती है। नाटक में मौसम के साथ चलकर जैविक खेती करने के बारे में बताया गया। इसके साथ ही यह संदेश दिया गया कि किसान को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और पानी की बचत करने के साथ ही खेतों की मेड़ में पौधे लगाने होंगे। साथ ही जैविक खेती के साथ वहां मुर्गी पालन व पशु पालन करके अधिक लाभ कमाया जा सकता है इसकी जानकारी भी दी गई।

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