Not for the public but for officers constructing millions of swimming pool!
जांजगीर-चांपा.
एक बार फिर यह साबित हो गया कि जिला मुख्यालय जांजगीर में जनप्रतिनिधियों की नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की चलती है।
इसका जीता जागता सबूत शहर में लाखों की लागत से बन रहा स्वीमिंग पूल है, जिसके पूर्व निर्धारित स्थल को ऐन वक्त पर जिला प्रशासन की पहल पर बदल दिया गया। इस वजह से इसका
लाभ शहरवासियों को नहीं मिल पाएगा। शहरवासी सोच रहे कि स्वीमिंग पूल अफसरों के लिए बनवाया जा रहा है, जबकि पालिका की इस मामले में एक न चली है।
जिला बनने के बाद भी जांजगीर का विकास अपेक्षानुरूप नहीं हो रहा है। यह आरोप हमेशा से लगते रहे हैं कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि शहर की सुध नहीं ले रहे हैं। लिहाजा, यहां का विकास जिला
प्रशासन की जरुरत के हिसाब से होता है। यह बात शहर में निर्माणाधीन स्वीमिंग पूल को लेकर बिलकुल ठीक बैठ रही है। शहर में खेल सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है।
यहां सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं दिख रहा है। लंबे समय से खिलाडिय़ों की मांग पर हाई स्कूल मैदान का कायाकल्प किया जा रहा है, लेकिन यह भी प्रशासनिक जरुरत के कारण हो सका है।
कुछ ऐसा ही वाक्या निर्माणाधीन स्वीमिंग पूल को लेकर भी दिख रहा है। शहर में स्वीमिंग पूल बनाने की मांग विगत दस वर्षों से की जा रही थी।
इसके लिए नगरपालिका के पदाधिकारियों ने प्रस्ताव बनाकर शासन के पास भी भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल रही थी। पालिका पदाधिकारियों ने स्वीमिंग पूल के लिए वार्ड नंबर 16 स्थित गेड़ी डबरी का चयन किया था।
वार्डवासी भी इस डबरी की बदहाली से परेशान हो चुके हैं, जो स्वीमिंग पूल निर्माण की खबर के बाद राहत की सांस ले रहे थे, लेकिन यहां एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की न चली और
स्वीमिंग पूल का निर्माण स्थल देखते ही देखते बदल गया। अब स्वीमिंग पूल जिले के अफसरों की कॉलोनी के करीब कलेक्टर बंगले के ठीक सामने बन रहा है।
बताया जा रहा है कि स्थल परिवर्तन प्रशासनिक अधिकारियों की शह पर हुआ है, लेकिन इस संबंध में नगरपालिका के पदाधिकारी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।
स्वीमिंग पूल की शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद करीब दो वर्ष गुजर गया, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ, जिससे एक बार पूल के निर्माण पर ही कोहरा छा गया था।
इसके बाद अचानक शासन से स्थल परिवर्तन का पत्र मिला और इसका निर्माण शुरू किया गया। जनप्रतिनिधि दबी जुबान से कहते हैं कि स्थल सहित प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था,
लेकिन स्थल परिवर्तन समझ से परे है। वे इस बात को भी मानते हैं कि कहीं न कहीं अधिकारी रायपुर मुख्यालय में अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर बिना परिषद के प्रस्ताव के ही स्थल परिवर्तन करा लिए हैं।
स्टीमेट में भी गड़बड़ी
पालिका द्वारा बनवाए जा रहे स्वीमिंग पूल के लिए बनाए गए स्टीमेट में भी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पूल पहले गेड़ी डबरी में बनाया जाना था,
जिसके हिसाब से इंजीनियरों द्वारा स्टीमेट बनाया गया है। डबरी में भरी पत्थर हैं, जिसके तोडऩे का उल्लेख स्टीमेट में है, लेकिन परिवर्तित स्थल साफ है।
इतना ही नहीं, कलेक्टर बंगले के पास बनाए जा रहे स्थल पर पहले से बड़ा गड्डा खुदा है, जिससे ठेकेदार को लाभ मिल रहा है।