
अब लखुर्री का बेल देश-विदेश में बनाएगा पहचान, राम बेल, स्वाती बेल के साथ झूलन बेल का भी ले सकेंगे स्वाद
जांजगीर-चांपा. लखुर्री के किसान रामप्रकाश केशरवानी के बेल की खुशबू अब उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी महकेगी। किसान ने अपने विभिन्न किस्मों के बेल को पेटेंट कराया है। केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान लखनऊ ने बेल का पेंटेंट कर लिया है। अब लखुर्री के बेल समूचे देश में अपना नाम रोशन करेगा।
गौरतलब है कि जिले के बम्हनीडीह ब्लाक के जय दुर्गा कृषक क्लब के द्वारा विभिन्न किस्मों के बेल की खेती की जाती है। क्लब के अध्यक्ष ने इसे पेटेंट कराने के लिए लखनऊ की संस्थान को भेजा था। संस्थान के सदस्यों ने लखुर्री गांव आकर इसका परीक्षण किया और परीक्षण के उपरांत पेटेंट कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।
बेल का सर्बत अमूमन गर्मी के दिनों में लू से बचने सर्तियां इलाज माना जाता है। बेल का सर्बत बाजार में गर्मियों के दिनों में इक्के-दुक्के स्थानों में मिलता है। जहां ग्राहकों की भीड़ दिखाई देती है। ग्रामीण अंचलों में अब भी बेल की खुशबू सिर चढ़कर बोल रहा है। घरों के बाडिय़ों में बेल के फल का उत्पादन अमूमन गर्मियों में होता है।
लखुर्री गांव में बेल की इतनी खेती होती है कि यहां के किसान उसकी फसल को आसपास के गांवों में बड़ी तादात में बिक्री करते हैं। यहां बरसाती बेल, राम बेल, स्वाती बेल, झूलन बेल, अमर बेल के किस्म पाए जाते हैं। लखुर्री के जय दुर्गा कृषक क्लब के संचालक रामप्रकाश केशरवानी ने इतने किस्मों के बेल को शोध के लिए केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान लखनऊ भेजा था। यहां के शोधकर्ता शिवपूजन द्विवेदी ने इतने किस्म के बेल को केमिकल एनालिसिस के लिए सलेक्ट कर लिया है। इसकी विभिन्न किस्म की वेरायटी को पेटेंट के लिए लखनऊ भेजा था।
इस संस्थान ने किया सलेक्ट
लखुर्री के बेल की जांच के लिए उत्तरप्रदेश के लखनऊ की संस्थान प्रोटेक्शन आफ प्लांट वेरायटी एंड फार्मस राइट आथोरिटी संस्था ने बेल को पेटेंट कराने के लिए सलेक्ट किया है। यहां की बेल यदि मानक में सही पाए जाते हैं तो निश्चित ही यहां की बेल की खुशबू देश में चर्चित होगी। जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। इतना ही नहीं यहां के बेल का उत्पादन देश-विदेश में जाएगा।
Updated on:
02 May 2019 07:13 pm
Published on:
02 May 2019 07:12 pm
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