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टिकट के चक्कर में कई यात्रियों की छूट जाती है रेलगाड़ी, स्टेशन में सिर्फ दो काउंटर

- जिले का दर्जा मिलने के दो दशक बाद भी नैला रेलवे स्टेशन की तस्वीर नहीं बदली
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जांजगीर चंपा

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Shiv Singh

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Updated: 14 Dec 2018, 9:59 PM IST

टिकट के चक्कर में कई यात्रियों की छूट जाती  है रेलगाड़ी, स्टेशन में सिर्फ दो काउंटर

टिकट के चक्कर में कई यात्रियों की छूट जाती है रेलगाड़ी, स्टेशन में सिर्फ दो काउंटर

जांजगीर-चांपा. जांजगीर स्टेशन में टिकट कटाना यात्रियों को लोहे का चना चबाने से कम नहीं लगता। केवल दो टिकट काउंटर होने से यात्रियों को लंबी लाइन लगानी पड़ती है। लाइन इतनी लंबी होती है कि २५ फीसदी यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है। जिले का दर्जा मिलने के दो दशक बाद भी नैला रेलवे स्टेशन की तस्वीर नहीं बदली है। जांजगीर नैला स्टेशन में सुविधाएं बढ़ाई जा रही, लेकिन टिकट घर में काउंटरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। जांजगीर स्टेशन में सबसे अधिक आपाधापी सुबह ७ बजे से शुरू होती है।

सुबह टिटलागढ़, इंटरसिटी एक्सप्रेस, जनशताब्दी, कोरबा सहित एक दर्जन ट्रेनों का नैला स्टेशन में स्टापेज रहती है। सुबह ७ बसे १० बजे के बीच तकरीबन एक हजार से अधिक यात्री विभिन्न दिशाओं में आवागमन करने यात्रा की शुरूआत करते हैं। दुखद बात यह है कि एक हजार यात्रियों के लिए केवल दो टिकट काउंटर खुलती है। इतने काउंटर में यात्री खचाखच भरे होते हैं। किसी यात्रियों की ट्रेन आ चुकी होती है तो किसी ट्रेन की घंटी बज चुकी होती है। कई ट्रेन तो स्टेशन में आ चुकी होती है। बावजूद यात्रियों को टिकट नहीं मिली रहती। ऐसे में यात्रियों को हड़बड़ी में दौड़ते हुए चलती ट्रेन में सवार होना पड़ता है।
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क्या मिलना चाहिए
नियम के मुताबिक जांजगीर नैला स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा मिल चुका है। मॉडल स्टेशन के अनुरूप यहां सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। नए प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन टिकट काउंटर के अलावा पानी, बैठक व धूप से बचने जैसे जरूरी सुविधा मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रही है। नियम के मुताबिक यहां कम से कम तीन टिकट काउंटर होना चाहिए। भीड़ बढऩे की स्थिति में तीसरे काउंटर से भी टिकट प्रदान करना चाहिए। जिसकी मांग की जा रही है।

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