
उफ ये गर्मी...पर जिले के किसी भी अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं
इससे गर्मी के दिनों में जलने की शिकायत आम हो जाती है, लेकिन जिले में उन्हें माकूल इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती। हाल ही में जिला अस्पताल को कालाकल्प के लिए भले ही रंग रोगन कर चकाचक की गई थी पर बर्न यूनिट की स्थापना पर किसी का ध्यान नहीं है। अलबत्ता जले हुए लोगों की जान यूं ही जा रही है। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में इन दिनों रंग रोगन के लिए काफी खर्च की जा रही है। वहीं बच्चों के वार्ड में अत्याधुनिक मशीन लगाई गई है। इसी तरह जिला अस्पताल में और भी कई सुविधाएं बढ़ाई जा रही है, लेकिन बर्न यूनिट की स्थापना नहीं की जा रही है। इसके पीछे प्रमुख वजह खर्च वाली बड़ी सुविधा की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि बर्न यूनिट की स्थापना नहीं हो पाती। इसके लिए शहरवासी भी अनजान रहते हैं। न तो समाजसेवियों द्वारा इसके लिए आवाज उठाई जाती और न ही बड़े अफसर संज्ञान में लेते। इसके कारण इस सुविधा के लिए जिले के लोगों को सिम्स पर निर्भर होना पड़ता है।
डीएमएफ से लाखों की सैलरी पर खर्च
जिला अस्पताल में एक एक डॉक्टरों को लाखों रुपए की सेलरी दी जाती है, लेकिन बर्न यूनिट के कौड़ी की खर्च नहीं की जा रही है। जबकि यह निहायत जरूरी है। क्योंकि आने वाले दिनों में भीषण गर्मी शुरू होने वाली है। लोग जलकर अपनी जान बचाने जद्दोजहद करते हैं। आखिरकार उन्हें एंबुलेंस से सिम्स का रास्ता ही अख्तियार करना पड़ता है।
एक साल से कर रहे कवायद
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट बनाने के लिए बीते एक साल से सिविल सर्जन की कवायद जारी है। लेकिन न जाने ऐसा क्या सुविधा दी जाएगी मरीजों को कि एक साल में भी हम बर्न यूनिट नहीं बना पाए। इस संबंध में जिला अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हमारी कवायद जारी है। इस यूनिट में फिनिसिंग का काम शेष रह गया है। बाकी अन्य तैयारी पूरी हो चुकी है।
बर्न यूनिट के लिए हमारी कवायद तेजी से जारी है। सिर्फ फिनिसिंग का काम बाकी है। हमारी कोशिश है कि यह यूनिट बहुत जल्द बने, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल सके।
-डॉ. अनिल जगत, सिविल सर्जन
Published on:
30 Mar 2024 09:40 pm

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