खासकर सिंचाई विभाग के आफिस के सामने की नहर पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। नहर में तनिक भी सुराख लगा तो पूरा पानी आधे शहर को ले डूबेगा। इससे सिंचाई विभाग अनजान है
जांजगीर-चांपा. इन दिनों नहर में पूरी तरह से पाटो पाट पनी बह रहा है। जर्जर नहर में इतनी ज्यादा मात्रा में पानी छोड़ा गया है कि कहीं किसानों को अंतिम दौर में पानी की कमी न पड़े। वहीं दूसरी ओर पांच दशक का सफर तय करने के बाद नहर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। कहीं कहीं जर्जर होने की स्थिति में रेत की ढेर लगाकर नहर के पार का बचाव किया गया है। खासकर सिंचाई विभाग के आफिस के सामने की नहर पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। नहर में तनिक भी सुराख लगा तो पूरा पानी आधे शहर को ले डूबेगा। इससे सिंचाई विभाग अनजान है।
आपको बता दें कि कोरबा जिले के पहाड़ गांव के पास कुछ इसी नहर के टूटने से तीन जिले के किसानों को एक माह तक सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाया था। कुछ ऐसी ही स्थिति जांजगीर जिला मुख्यालय के करीब देखने को मिल रही है। क्योंकि नहर में इन दिनों लबालब पानी छोड़ा गया है। सिंचाई के लिए यह अंतिम दौर का पानी है। इसके बाद दिवाली के करीब आते तक नहर बंद कर दिया जाएगा। यहां गौर करने वाली बात यह है कि नहर कई स्थानों से बेहद जर्जर हो चुकी है। जिससे पानी जरा भी लीक हुई तो पूरा शहर पानी-पानी हो जाएगा। यह स्थिति कहीं और नहीं बल्कि सिंचाई विभाग के आफिस के पास ही है। जिसे देखने सिंचाई विभाग के अफसरों के पास समय नहीं है।
रेत की बोरी रख किए सुरक्षा उपाय
नहर की हालत को देखते हुए सिंचाई विभाग के अफसरों ने कुछ दिन पहले यहां पर रेत की बोरियों को रखा गया है ताकि कहीं नहर का पार कमजोर न हो। जबकि जानकारों की माने तो नहर में पानी छोड़े जाने के पहले यहां मजबूत सीमेंट कांक्रीटीकरण करनी चाहिए। ताकि नहर में मजबूती बनी रहे।
इस बात की सूचना हमे भी है। इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सुरक्षा के उपाय भी किए गए हैं।
-अर्जुन कुर्रे, ईई सिंचाई विभाग