
जांजगीर-चांपा. आरईएस विभाग के अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने की लालच में डेढ़-ढेढ़ करोड़ के दो टेंडर गलत तरीके से जारी कर दिए। इससे न सिर्फ शासन को लाखों रुपए की हानि हुई है, बल्कि इस टेंडर को लेने के लिए फार्म डालने वाले अन्य लोगों के साथ भी धोखा हुआ है। इस मामले की शिकायत लोगों ने विभाग के ईई एमपी मालवीय से कर टेंडर प्रक्रिया दोबारा कराने की भी मांग किया, लेकिन उन्होंने गोलमोल जवाब देकर उन्हें टाल दिया और आनन-फानन में इस कार्य के लिए एग्रीमेंट भी कर लिया, जिससे इस टेंडर को रद्द न किया जा सके।
शासन के द्वारा निर्माण कार्य के लिए जिस एसओआर दर पर टेंडर जारी किए जा रहे हैं वह वर्तमान मार्केट दर से कम है। इसलिए पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, हाऊसिंगबोर्ड व अन्य निर्माण एजेंसियों में जो भी टेंडर जारी हो रहे हैं वह 20 प्रतिशत से भी कम दर पर जा रहे हैं, लेकिन जिले में आरईएस विभाग के अधिकारियों ने कमीशन की लालच में अपने चहेते ठेकेदारों को डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए दो कार्य मात्र प्वाइंट 21 और प्वाइंट 11 प्रतिशत कम रेट पर दे दिया है।
यह टेंडर ठेकेदारों ने फाइट करके लिया होता तो ठीक लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारी से सेटिंग करके इस टेंडर में भाग लेने वाले अन्य ठेकेदारों को अलग-अलग कमियां बताकर डिसक्वालीफाई कर दिया और दोनों ठेकेदार को अकेले-अकेले क्वालीफाई करते हुए उन्हें एकल टेंडर पास कर काम दे दिया है।
ईई का नहीं कोई ठिकाना
इस सबंध में विभाग के ईई एमपी मालवीय से चर्चा करने के लिए कई बार उनके दफ्तर जाया गया, लेकिन वह न तो दफ्तर में मिले और न ही वह फोन रिसीव करते हैं। कार्यालय में उपस्थित अन्य कर्मचारियों का कहना है कि जो भी जानकारी होगी वह सक्षम अधिकारी ही बता पाएंगे।
Published on:
27 Nov 2017 06:58 pm
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