
कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षर्थियों को सालों से नहीं मिला मानदेय
जांजगीर-चांपा. मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत निर्माण श्रमिक कौशल विकास एवं परिवार सशक्तीकरण योजना के तहत प्रशिक्षार्थियों को सालों से छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है। प्रशिक्षार्थी छात्रवृत्ति पाने दफ्तर के चक्कर काटने मजबूर हैं, लेकिन श्रम विभाग के अफसरों को इससे कोई सरोकार नहीं है। योजना के तहत सैकड़ो महिलाओं ने मंगलवार को श्रम विभाग के दफ्तर का घेराव कर दिया और छात्रवृत्ति प्रदान करने की मांग की है। बहुत जल्द छात्रवृत्ति नहीं मिलने की स्थिति में महिला प्रशिक्षार्थियों ने आंदोलन की चेतवनी दी है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी (वीटीपी) द्वारा श्रम विभाग द्वारा प्लंबर एवं मेशन का पहला बैच पिछले वर्ष यानी २०१७ में सांचालित हो रहा था। दूसरा बैच जनवरी २०१८ तक पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण में सैकड़ो महिला एवं पुरूषों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षार्थियों को शासन की योजना के तहत मानदेय भी दिया जाता है। लेकिन ९ माह बीत जाने के बाद भी प्रशिक्षार्थियों को अब तक मानदेय (छात्रवृत्ति) प्रदान नहीं किया गया है। इसके चलते प्रशिक्षार्थी बेहद परेशान हैं। बीते नौ माह से प्रशिक्षार्थी दफ्तर के चक्कर काट रहीं हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। हर बार की तरह सैकड़ो महिलाएं मंगलवार को फिर श्रम विभाग के दफ्तर का घेराव कर दिया। महिलाएं सरकारी विरोध नारेबाजी करते हुए श्रम विभाग के अफसर से मिलना चाह रहे थे, लेकिन श्रम पदाधिकारी का पता नहीं था। इस संबंध में महिलाओं ने श्रम पदाधिकारी को फोन भी लगाया, लेकिन श्रम पदाधिकारी वीआर पटेल ने महिलाओं का फोन भी रिसीव नहीं किया। इसके चलते महिलाएं अन्य अधिकारी को अपना ज्ञापन सौंपकर बैरंग लौट गए। ज्ञापन सौपने वाली महिलाओं में सोनल, पुनीता, शशिकांती, प्रियंका, प्रिया, आरती, संतोषी, अनीता, अंजनी सहित सैकड़ो महिलाएं शामिल थीं।
श्रम विभाग में हर काम में भ्रष्टाचार
श्रम विभाग में हर काम कमीशन के आधार में संचालित हो रहा है। श्रम विभाग की प्रत्येक योजनाओं के संचालन के लिए मैदानी स्तर में दलाल सक्रिय हैं। बाकायदा विभाग द्वारा चयनित श्रममित्रों द्वारा हर कार्य के लिए अपने ही अपने लोगों को योजनाओं का लाभ दिया जाता है। बाकायदा इसका कमीशन अफसरों तक पहुंचता है। इस संबंध में श्रम विभाग के अफसरों के अफसरों से उनका पक्ष जानने के लिए श्रम पदाधिकारी वीआर पटेल के मोबाइल से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
Updated on:
18 Sept 2018 08:31 pm
Published on:
18 Sept 2018 08:31 pm
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