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लौटी रौनक: ठंड में क्रोक्रोडायल पार्क में पहुंच रहे पर्यटकों की भीड़

देश का दूसरा व प्रदेश का एकमात्र क्राकोडायल पार्क में अब फिर से रौनक लौटने लगी है। ठंड के दस्तक के साथ ही जिला सहित दूसरे जिले से भी पर्यटक पहुंचने लगे हैं। हर रोज बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचकर मगरमच्छ को नजदीक से देखने का आनंद उठा रहे है। साथ ही पार्क में झूला व अन्य संसाधन का लुत्फ उठा रहे है।प्रदेश का एकमात्र क्रोकोडायल पार्क कोटमीसोनार में स्थित है। जहां पर वर्तमान 3५0 की संख्या में मगरमच्छ 80 एकड़ के तलाब में विचरण कर रहे है।

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लौटी रौनक: ठंड में क्रोक्रोडायल पार्क में पहुंच रहे पर्यटकों की भीड़

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वन विभाग के देखरेख में मगरमच्छों की भोजन व्यवस्था हो रही है। पर्यटन स्थल के रूप क्रोकोडायल पार्क को विकसित किया गया है, यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, वाच टावर, फिसल पट्टी आदि लगाए गए है। क्षेत्र सहित राज्यभर के लोग वर्तमान में प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में मगरमच्छ देखने पहुंच रहे है। बाकी सीजन में क्रोकोडायल पार्क में पर्यटकों की संख्या कम होने की वजह से सन्नाटा पसरा रहता था। अब ठंड के सीजन में भीड़ बढऩे लगी है। इससे वन विभाग की आदमनी में बढ़ोतरी हो रही है। पिछले ३ दिन में १५०० से ज्यादा पर्यटक क्रोकोडायल पार्क पहुंचे। रविवार छुट्टी होने की वजह से भीड़ कुछ ज्यादा रही। रविवार को एक दिन ५०० से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। पार्क में प्रति व्यक्ति शुल्क २० रुपए तो बच्चों के लिए १० रुपए निर्धारित किया गया है। इस दौरान पार्क के पार्किंग में वाहनों कतारें लगी रही। प्रदेश में एकमात्र क्रोक्रोडायल पार्क की पहचान देश में दिलाने की योजना थी, लेकिन उस हिसाब से वन विभाग काम नहीं कर पा रहा है। अगर क्रोकोडायल पार्क में वन विभाग ध्यान सुविधा व संसाधन बढ़ाती तो पर्यटकों की संख्या और बढऩे की संभावना है।


पर्यटकों की पहली पसंद बने सीताराम
गांव के सीताराम बाबा का मगरमच्छों से गहरा लगाव है। लगभग 14 साल पहले एक दिन तालाब में एक बच्चे को मगरमच्छ दिखाते समय उसके बाएं हाथ को मगरमच्छ पकड़ लिया और पानी अंदर ले गया ऐसे में उसने दूसरे हाथ से अपना बचाव किया और मगरमच्छ की आंख में दूसरा हाथ लगने से मगरमच्छ ने उन्हें छोड़ दिया मगर उसकी हथेली कट गई। फिर भी सीताराम का मगरमच्छों से लगाव कम नहीं हुआ। बल्कि इस हादसे के बाद से मगरमच्छों के प्रति इनका लगाव और बढ गया। ऐसा लगता है जैसे मगरमच्छों ने अब इन्हें अपना मित्र भी बना लिया है। आवाज सुनकर मगरमच्छ पानी से बाहर निकल आते है। जिसे देखकर पर्यटक आनन्द उठाते है।


ठंड में बाहर आते हैं मगरमच्छ
क्रोकोडायल पार्क में ठंड के मौसम में मगरमच्छ बड़ी संख्या में धूप सेकने के लिए पार्क के पानी के बाहर रहना पसंद करते हैं। इसलिए इन अन्य दिनों की तुलना में मगरमच्छों की संख्या अधिक होती है। वर्तमान ठंड के समय अधिकांश छुट्टी मनाने के लिए पर्यटन स्थल जाकर मौज मस्ती करते है। ऐसे में जिले के साथ-साथ बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा के पर्यटक भी बढ़ी संख्या में क्रोकोडायल पार्क में पहुंचे थे।

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