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गांव का हैंडपंप बिगड़ा तो नदी का पानी पीने मजबूर पतरापाली के ग्रामीण

बलौदा ब्लॉक के अंतिम छोर में बसे पतरापाली केराकछार के ग्रामीण इन दिनों गांव का हैंडपंप बिगड़ जाने से नदी का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों ने सरपंच को आवेदन देते थक चुके। लेकिन उन्होंने ग्रामीणों की सुध नहीं ली। जिसके चलते ग्रामीणों को कलेक्टर से गुहार लगानी पड़ी।

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गांव का हैंडपंप बिगड़ा तो नदी का पानी पीने मजबूर पतरापाली के ग्रामीण

गांव का हैंडपंप बिगड़ा तो नदी का पानी पीने मजबूर पतरापाली के ग्रामीण

जांजगीर-चांपा। इसके बाद भी यदि गांव में पानी की व्यस्था नहीं हुई तो वे कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत करने मजबूर होंगे। फिलहाल ग्रामीणों को इस बात की चिंता सता रही है कि नदी का पानी से कहीं उन्हें जल जनित बीमारी न हो। ऐसे में गांव में डायरिया जैसे महामारी की समस्या से जूझना पड़ जाएगा। ग्रामीण ढेल कुमार, उमेंदराम, सुशीला, अनीता कंवर, अगहन, लाल सिंह, रमशीला, तिहारिन ने बताया कि गांव में दो बोर है। जिसमें एक में पानी टंकी लगाकर सामूहिक रूप से जलआपूर्ति की जाती है। वहीं दूसरा हैंडपंप है। ये दोनों सिस्टम बिगड़ा पड़ा है। पानी की सुविधा नहीं होने से ग्रामीण पास के नदी से पानी लाकर पी रहे हैं। हिसके चलते उन्हें गंभीर बीमारी की चिंता सता रही है।
गांव का जिम्मेदार नागरिक बेसुध
गांव के नकुल, समारिन बाई, फूल बाई, बुधवार सिंह एवं नवल सिंह ने बताया कि अपनी शिकायत पहले हमने सरपंच को सुनाई लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव की समस्या को लेकर सरपंच को कोई सरोकार नहीं रहता। जिसके चलते उन्हें बिजली पानी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कहां गया जल जीवन मिशन
एक ओर सरकार जिले में ६०० करोड़ रुपए खर्च कर जल जीवन मिशन का संचालन कर रही है। योजना के माध्यम से घर घर में पानी पहुंचाने की बीड़ा उठाई है। वहीं दूसरी ओर गांव के लोग नदी का पानी पीने मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार की योजना धरी की धरी रह जा रही है।
वर्जन
गांव में यदि इस तरह की दिक्कतें है तो तत्काल उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। ताकि ग्रामीणों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिल सके।
-तारन प्रकाश सिन्हा, कलेक्टर