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हम नहीं सुधरेंगे…पहले बीएम की गई कुर्सी, दूसरे के द्वारा भी आधी रात बैंक से लाखों का भुगतान

जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक में लाख कोशिशों के बाद भी भर्राशाही थमने का नाम नहीं ले रही। यहां देर रात तक किसानों को लाखों रुपए का भुगतान किया जा रहा है।

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हम नहीं सुधरेंगे...पहले बीएम की गई कुर्सी, दूसरे के द्वारा भी आधी रात बैंक से लाखों का भुगतान

हम नहीं सुधरेंगे...पहले बीएम की गई कुर्सी, दूसरे के द्वारा भी आधी रात बैंक से लाखों का भुगतान

जबकि पत्रिका ने 2 फरवरी को स्टिंग कर ऐसी भर्राशाही को उजागर किया था। इसके बाद तत्कालीन ब्रांच मैनेजर ओजस्वी बिसेन को हटा दिया गया था। इसके बाद हाल ही में संतोष कुमार सोनी की नियुक्ति हुई है। संतोष कुमार सोनी के आने के बाद भी वही पुराना ढर्रा बदस्तूर जारी है। पत्रिका ने गुरुवार की रात 8 बजे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में किसानों की भीड़ भाड़ का नजारा देखकर जब अंदर प्रवेश किए तो किसानों की भीड़ लगी थी। किसानों को देर रात तक 25 हजार रुपए से 1 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा था। इस संंबंध में जब ब्रांच मैनेजर से बात की गई तो उनका कहना था कि बैंक में बार बार सर्वर डाउन होने की वजह से काम काज प्रभावित हो रहा है। इसके चलते बैंक को देर रात तक खोलकर भुगतान किया जा रहा है। जबकि देश में सबसे पहले नियम कानून से काम होता है तो वह है बैंक। बात सुबह खुलने की हो या फिर लंच टाइम व शाम को बंद होने का टाइम हो। लेकिन यहां का जिला सहकारी बैंक अपने खुद के नियम कानून से मनमानी तरीके से संचालित किया जा रहा है।


आरोप कमीशन के बेस में होता है भुगतान


इधर बैंक के देर रात तक खुलने के बारे में किसानों का आरोप है कि यहां एक फीसदी कमीशन के बेस में कभी भी जिनती रकम की जरूरत हो ले सकते हैं। इसके लिए बाकायदा यहां के प्यून से लेकर अन्य कैस काउंटर के कर्मचारी आपस में मिले होते हैं। सभी को भुगतान के बाद कमीशन का हिस्सा मिल जाता है। यही वजह है कि बैंक देर रात तक संचालित होता है। इन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं होता। इसकी शिकायत संभाग स्तर पर भी की जा चुकी है। लेकिन ऊपर भी कोई सुनने वाला नहीं होता।


पहले की शिकायत तो हटाए गए थे बीएम


जबकि इस बात की शिकायत पिछले बार 2 फरवरी को कलेक्टर से की गई थी। कलेक्टर ने जांच के लिए नायब तहसीलदार को मौके पर भेजकर जांच करवाई थी। जांच में यह स्पष्ट हो चुका था कि दर्जन भर किसानों को देर रात तक भुगतान किया जा रहा था। बाकायदा उनके विड्रॉल फार्म भी जब्त किए थे। नायब तहसीलदार प्रशांत पटेल ने पंचनामा तैयार कर पूरी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी। इसके बाद तत्कालीन ब्रांच मैनेजर ओजस्वी बिसेन को यहां से हटा दिया था। कुछ दिन तक यहां के रवैया ठीक ठाक रहा माह भर बाद फिर पुराने ढर्रे पर काम शुरू हो गया।


हो चुकी लूट की तीन घटनाएं


बैंक से पैसे निकालने के बाद अक्सर किसान लूट के शिकार होते हैं। जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों में भी लूट की तीन तीन घटनाएं हो चुकी है। जिसमें आरोपियों का अब तक सुराग नहीं लगा है। इसकी प्रमुख वजह भी यही है। किसानों को सकर्त होकर चलना नहीं आता। कई किसान बाइक में ही रकम छोड़ देते हैं और दुकान में खरीददारी के लिए निकल पड़ते हैं।


सीधी बात: संतोष कुमार सोनी, ब्रांच मैनेजर


सवाल: रात 8 बजे तक बैंक खोलकर मनमानी से पैसे बांट रहे हैं?


जवाब: बीच बीच में सर्वर डाउन होने की वजह से देर रात तक भुगतान किया जा रहा है।


सवाल: इससे पहले भी कई बार शिकायतें मिल चुकी, बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा?


जवाब: अभी मैं नया ज्वाइन किया हूं। व्यवस्था सुधारने में थोड़ा समय लगेगा।


सवाल: देर रात भुगतान से किसान लूट के भी शिकार हो सकते हैं?


जवाब: बैंक के बाहर बार-बार सर्चिंग की जाती है।


सवाल: आरोप लगते हैं कि कमीशन के बेस में जितनी भी रकम ले लो?


जवाब: नहीं यह गलत है, हम यहां केवल 25-25 हजार रुपए ही भुगतान कर रहे हैं।


सवाल: पहले भी शिकायतें कलेक्टर से की गई थी, जिसमें जांच के बाद मामला सही निकला?


जवाब: आपकी बातें सही है। मैं यहां की व्यवस्था सुधारने हरसंभव प्रयास करूंगा।

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