फा. डिसूजा ने 1972 में शिष्यगण संस्था की रखी थी नींव
जशपुरनगर. 26 मई को कुनकुरी के शांतिपारा में जशपुर कैथोलिक धर्मप्रांत में सेवारत और शिष्यगण संस्था के संस्थापक फादर जो. डिसूजा के समर्पण जीवन का डायमण्ड तथा पुरोहिताई का गोल्डन जुबली बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया इन धार्मिक समारोह में धार्मिक विधान के साथ ईश्वर के प्रति कृतग्यता प्रकट करने एक दूसरे को आभार प्रर्दशन हेतु मिस्सा पूजा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस समारोह में देश के विभिन्न स्थानों से अतिथि एवं श्रध्दालु बड़ी संख्यों में शामिल हुए। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत मिस्सा पूजा रखा गया जिसके मुख्य अनुष्ठाता जशपुर धर्मप्रांत के बिशप एम्मानुएल केरकेट्टा, जगदलपुर बिशप जोसेफ , अम्बिकापुर के बिशप पतरस मिंज, रायगढ़ धर्मप्रांत के बिशप पॉल टोप्पो, येसु समाज के प्रोविंशियल कल्यानुस मिंज, एवं डीवीटेक डायरेक्टर फा. एम जोश, फा. जॉय, फा. भिंसेन्ट एसजे दिल्ली शामिल थे।
24 अप्रैल 1968 को फादर जो. डिसूजा का पुरोहित अभिषेक हुआ अत: धर्म समाज में 60 साल एवं पुरोहिताई के 50 वर्ष के इस गोल्डन एवं डायमण्ड जुबली के अवसर पर बधाई देने के लिए कुनकुरी नगर पंचायत अध्यक्ष सुदबल राम यादव, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मुरारी अग्रवाल सहित शाला निर्देशक फा. सुनील केरकेट्टा, कई पुरोहित, सिस्टर और आसपास के ग्रामीण श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था।
बेसहारे बच्चों के संरक्षक एवं मददगार : फा. डिसूजा ने 1972 में 16 बालिकाओं के साथ शिष्यगण संस्था की नींव बंगाल कृष्णानगर धर्मप्रांत के बनगॉंव में रखी। इसके तुरन्त बाद छत्तीसगढ़ जशपुर के जोक बाहला चर्च आए। अपने प्रेरणादायक काम को जारी रखते हुए उन्होंने शिष्यगण संस्था को आगे बढ़ाया। इस शिष्यगण संस्था में लड़के और लड़कियां जो लोगों की एवं समाज की सेवा हेतु तत्पर हैं वे आकर शामिल होते है एवं कुंवारे रह कर आज्ञापालन, निर्धनता एवं ब्राहमचारी का व्रत लेते हैं। फिलहाल देश एवं विदेशों में रह कर 425 धर्मबहने एवं 70 धर्मबंधु 55 धर्मप्रातों में सेवा के कामों में लगे हैं। कई बच्चे पढ़ लिख कर आगे बढ़ रहे हैं।