
जशपुरनगर . छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला जेल में चल रहे एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। दरअसल अनोखे तरीके से अधिकारी और कर्मचारी के द्वारा पैसा गबन करने का मामला प्रकाश में आया है। जिला पुलिस अधीक्षक से हुई शिकायत के बाद मामले जांच शुरु कर दी गई है। जेल प्रशासन के साथ-साथ पुलिस के द्वारा भी इसकी जांच की जा रही है। जशपुर पुलिस की जांच के बाद घटना के समय के तत्कालीन जेलर और वहां के कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज हो सकता है।
आपको बता दें जेलर और वहां के मुख्य प्रहरी ने मिलकर पीड़ित पक्ष को मिलने वाली राशि को फर्जी पीड़ित बनाकर आहरण कर लिया था। इसकी जानकारी जब पीड़ित को हुई तो उसने इसकी शिकायत जेल प्रशासन से की थी।इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जेल में पीड़ित पक्ष की राशि के नाम से एक योजना चलाई जाती है। इस योजना के अंतर्गत जिला जेल के तत्कालीन जेलर और वहां के मुख्य प्रहरी ने मिलकर फर्जीवाड़ा करते हुए पीड़ित पक्ष की राशि का गबन कर दिया।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 में दुलदुला थाना क्षेत्र के सिमड़ा घटोरा में रहने वाले निरंजन राम ने अपनी मां की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। निरंजन के जेल चले जाने के बाद उसके घर में उसके वृद्ध पिता सदई यादव और भाई निधी यादव ही बचे थे। हत्या के मामले में निरंजन यादव को न्यायालय से आजीवन करावास की सजा सुना दी गई थी। जिसके बाद उसे जशपुर जेल से अंबिकापुर जेल के लिए भेज दिया गया था। जहां निरंजन यादव जेल में रहते हुए जेल के अंदर ही काम करता था। जिससे उसे काम के बदले में पारीश्रमिक भी मिलता था।
नियम के अनुसार मेहनताना का आधा हिस्सा उसके वृद्ध पिता को मिलता था। पीड़ित पक्ष की राशि लेने के लिए दो से तीन बार निरंजन यादव का पिता सदई यादव जिला जेल जशपुर में आकर अपने पीड़ित पक्ष की राशि का चेक लेकर गया था। पहले बार में उसे 6354 रुपए का पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान किया गया था। दो से तीन बार राशि लेने के बाद उसे पीड़ित पक्ष की राशि मिलना बंद हो गया था। जिसके बाद उसने जेल प्रशासन को इसकी शिकायत की। सदई यादव के द्वारा शिकायत किए जाने के बाद पता चला कि उसके पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान उसकी बेटी को कर दिया गया है।
पुलिस के फर्जी सील साईन का किया उपयोग
निशा यादव का सदई यादव की फर्जी बेटी बनाने के लिए दुलदुला थाने का फर्जी सील और साईन का भी उपयोग किया गया था। जेल के द्वारा पीड़ित पक्ष की राशि देने से पहले पीड़ित पक्ष की जानकारी और उसका प्रमाण पत्र संबंधित थाना क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। पुलिस के द्वारा पीड़ित पक्ष की जानकारी और प्रमाण पत्र देने के बाद ही जेल प्रशासन के द्वारा राशि प्रदान की जाती है। तत्कालीन जेलर और मुख्य प्रहरी ने मिलकर निशा यादव को सदई यादव की बेटी बनाने के लिए दुलदुला थाने का फर्जी सील और थाना प्रभारी का फर्जी हस्ताक्षर कर पीड़ित का प्रमाण पत्र जारी कर दिया था। प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उसके खाते में 21 हजार रुपए भी भुगतान भी किया गया था।
अब पीड़ित ने एसपी से की शिकायत
पूर्व में उम्र कैद की सजा काट रहे बेटे के पिता सदई यादव के द्वारा जशपुर जिला जेल प्रशासन से पीड़ित पक्ष की राशि के ना मिलने की शिकायत की गई थी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने जशपुर पुलिस को मामले की जांच का जिम्मा दिया था। लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मामले की शिकायत की है।जिसमें जांच शुरू हो गई है।
जेलर और मुख्य प्रहरी ने बना दिया फर्जी बेटी
जानकारी के अनुसार पीड़ित सदई यादव की कोई भी बेटी नहीं है उसके दो ही बेटे हैं एक निधी यादव और एक निरंजन यादव। जिसमें से निरंजन यादव अपनी मां की हत्या के आरोप में सजा काट रहा था। सदई यादव को जब जेल से जानकारी मिली की उसके पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान उसकी बेटी को किया गया है तो उसने इस फर्जीवाड़े की शिकायत फिर से जिला जेल में कर दी।
सदई यादव के द्वारा शिकायत करने के बाद जब इसकी जांच शुरु की गई तो पता चला कि तत्कालीन जेलर उत्तम पटेल और मुख्य प्रहरी होतम सिंह मोर्या के द्वारा फर्जी शपथ पत्र तैयार करते हुए निशा यादव को उसकी बेटी बना दिया था। उन्होने फर्जी शपथ पत्र में सदई यादव का अंगूठे का निशान भी फर्जी तरीके से लगाया था। जबकी सदई यादव अपने अंगूठा ना लगाते हुए हस्ताक्षर की जगह पर अपना नाम लिखता है। वहीं फर्जी तरीके से पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान करने के लिए निशा यादव के नाम ने रायगढ़ के कोटक महेंद्रा बैंक में उसका खाता खुलावा कर पीड़ित पक्ष की राशि का 21 हजार रुपए का भुगतान उसके खाते में कर दिया गया था।
शिकायत के बाद प्रहरी पंहुचाने गया था राशि
सदई यादव के द्वारा मामले की शिकायत कर दिए जाने के बाद जशपुर जिला जेल का मुख्य प्रहरी होतम सिंह मोर्या पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान करने के लिए सदई यादव के घर एक अन्य व्यक्ति को लेकर फरवरी 2019 में गया था। उसके द्वारा यादव के घर पंहुचने पर ग्रामीणों ने उन्हें घेर कर बंधक बना लिया गया था। जिसके बाद दुलदुला पुलिस ने मौके पर पंहुच कर जेल के मुख्य प्रहरी होतम सिंह मोर्य को पहचान कर उसे छुड़वाया था। इस मामले के बाद मुख्य प्रहरी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। जिसमें उसने कहा है कि तत्कानीन जेलर उत्तम पटेल के कहने पर ही वह पीड़ित पक्ष की राशि देने के लिए सदई यादव के घर गया था।
इस मामले में बंदी के पिता के द्वारा शिकायत आई है जिसकी जांच जारी है।
शंकर लाल बघेल, एसपी जशपुर
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Updated on:
21 Oct 2019 05:36 pm
Published on:
21 Oct 2019 05:19 pm
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