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ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद भी नहीं बना जशपुर-सन्ना मार्ग

विडंबना: जशपुर से सन्ना की 52 किमी की सड़क में से 9.3 किमी सड़क है अधूरी

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 Jashpur-Sanna road not built

जशपुर-सन्ना के बीच में अधूरी रह गई कच्ची सड़क।

जशपुरनगर. जशपुर जिले के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक क्षेत्र और पूरे प्रदेश के सबसे बड़ी पहाड़ी कोरवाओं आबादी चाले क्षेत्र सन्ना को बारहमासी पक्की सड़क से जोडऩे का कार्य आजादी के छ: दशक के बाद आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। इस सड़क को लेकर लंबे अर्से तक विवाद की स्थिति बनी रही। निर्माण कार्य में गड़बड़ी का मामला उजागर होने पर प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अफसरों के साथ निर्माण कंपनी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की थी। तात्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के पंड्रापाठ प्रवास के दौरान अधर में लटके जशपुर-सन्ना सड़क निर्माण का कार्य पूरा करने की घोषणा और फिर प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेष बघेल की घोषणा के बावजूद प्रशासन की लापरवाही से जशपुर-सन्ना मार्ग के पूरी सड़क के डामरीकरण सपना अधूरा ही रह गया है। जशपुर से सन्ना के बीच की ५२ किलोमीटर की सड़क में तकरीबन 10 किलोमीटर की सड़क का निर्माण अब भी अधर में लटका हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक सड़क के इसी हिस्से को लेकर वर्ष 2015 में विवाद की स्थिति बनी थी। अधूरे पड़े इस सड़क निर्माण को पूरा करने के लिए विभाग द्वारा प्रदेश सरकार को भेजे गए रिवाइज्ड प्राक्कलन की फाइल को बैरंग वापस कर चुकी है। इस तकरीबन 10 किलोमीटर की सड़क बारिश की वजह से इतनी अधिक जर्जर हो चुकी है कि इसे तय करने में ही 45 मिनट का समय लग रहा है। इस खराब सड़क की वजह से प्रदेश के पहाड़ी कोरवा जनजाति का सबसे बड़े आवासीय क्षेत्र तक पहुंचना अब भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

६५ साल में नहीं बन सकी 52 किमी सड़क : जिला मुख्यालय जशपुर से सन्ना की दूरी मात्र 52 किलोमीटर की है। इस क्षेत्र में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित पहाड़ी कोरवा जनजाति का मूल निवास है। सन्न पहाड़ी कोरवा जनजातियों का सबसे बड़ा निवास क्षेत्र भी है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ दुर्गम पहाडिय़ों के बीच से होकर गुजरने वाले जशपुर सन्ना मार्ग के निर्माण का खेल पिछले 60 साल से अधिक समय से चल रहा है। सड़क के निर्माण के लिये टेंडर और कुछ दिनों के निर्माण के बाद ठेकेदार द्वारा काम बंद कर दिये जाने का सिलसिला साल दर साल चल रहा है। वर्ष 2015 में पंड्रापाठ क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा लंबू राम की भूख से हुई कथित मौत के हाई प्रोफाइल मामले के बाद तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने पंड्रापाठ में भाजपा सरकार की वर्षगांठ मनाने पहुंचे थे। यहां उनका ध्यान अधूरे पड़े हुए जशपुर सन्न सड़क मार्ग की ओर आकृष्ट किए जाने पर तत्काल इसके लिए अतिरिक्त बजट आबंटित करने की घोषणा की थी। घोषणा पर अमल करते हुए प्रदेश सरकार ने राशि आबंटित कर दिया था। निविदा की प्रक्रिया पूरी कर क्लासिक कंस्ट्रक्शन कंपनी को 52 किलोमीटर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी नए सिरे से दी गई। इस बार सड़क के नवीनीकरण और चौड़ीकरण का काम किया गया। लेकिन इन सारे कवायदों के बावजूद इस सड़क का निर्माण कार्य अधूरा रह गया। जशपुर से तकरीबन 31 किलोमीटर दूर हर्रापाठ से सोनक्यारी के बीच तकरीबन 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है। विभागिय सूत्रों के मुताबिक इस हिस्से का निर्माण, निविदा प्रक्रिया में शामिल ही नहीं था। 52 किलोमीटर सड़क में बीच का 10 किलोमीटर क्यों छोड़ दिया।

हो चुकी है अधिकारियों पर कार्रवाई : बरसों से अधूरे पड़े जशपुर-सन्ना पहुंच मार्ग का मामला मई 2015 में प्रदेश स्तर पर जमकर सुर्खियां बटोरी थी। इस मामले को लेकर उस वक्त लोक निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया था, जब तात्कालीन लोक निर्माण विभाग 14 मई 2015 को एक दिवसीय प्रवास पर जशपुर पहुंचे थे। यहां इस सड़क की बदहाली और अधूरे पड़े निर्माण कार्य की ओर ध्यान आकृष्ट कराए जाने पर वे बुरी तरह से अधिकारियों पर बिफर पड़े थे। उन्होंने सड़क निर्माण किए बिना ही कंस्ट्रशन कंपनी को 4 करोड़ से अधिक की राशि भुगतान किए जाने पर विभाग के तीन अधिकारी और अंबिकापुर की एक निर्माण कंपनी के विरूद्व सिटी कोतवाली धारा 120 बी, 420, 467 और 468 के तहत सिटी कोतवाली अपराध दर्ज कराया गया था।