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फसलों पर ना मौसम हो रहा मेहरबान और ना यहां विचरण कर रहे जंगली हाथी

किसानों को धान की फसल में तो ४० प्रतिशत तक नुकसान का अंदेशा

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Elephants are damaging sugarcane and maize crops in the district.

जिले में गन्ना और मक्के की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हाथी।

जशपुरनगर. जिले के धान, मक्का, गन्ना और टमाटर तथा सब्जी उत्पादक किसानों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। मौसम और यहां विचरण कर रहे जंगली हाथियों के अलग-अलग दल जिले भर में पके-अधपके फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे प्रभावित किसानो को कहीं से मदद मिलती नजर नहीं आ रही, किसान परेशान हैं। किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। खास करके धान उत्पादक किसानों की पहली समस्या तो तब उठ खड़ी हुई जब गर्मी नौतपा के बाद काफी लंबे समय तक और धान की खेती के लिए फरहा नर्सरी लगाने का काम आगे खींचता चला गया। शुरुआती दौर में बारिश की बाढ़ इतनी लंबी खिंच गई कि कई जगह बुना और लेवा धान की लगाई गई फसल पूरी तरह सूख कर बर्बाद हो गई। किसान बताते हैं कि लगभग पूरे जिले में कई स्थाना पर रोपा के लिए लगाई गई नर्सरी, थरहा, कई जगह सूखकर खराब हो गए, क्योंकि सूखा के हालात की वजह से पौधे तैयार भी हो गए तो उन्हें रोपा लगाया नहीं जा सका।

अविृष्टि से धान उड़द और सब्जी की फसल बबार्द- पीडि़त किसान बताते हैं, ले देकर बारिश शुरू हुई तो अब मानसून का समय खत्म होने के बाद भी जिले में लगातार और मूसलाधार बारिश अब धान और सब्जी, दलहन तिलहन के साथ टमाटर की फसल को फायदा के स्थान पर नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। एक और जहां टमाटर और कई प्रकार की सब्जियां, उड़द और टमाटर की फसल लगातार बारिश में गलकर खराब हो गई तो दूसरी और धान की फसल पर पांकी सहित कई प्रकार की बीमारियां और कीट प्रकोप के मामले सामने आ रहे हैं जिससे किसानों ने धान की फसल पर 40 प्रतिशत तक फसलों को पूरी तरह नुकसान होने का अंदेशा है।

रही-सही कसर हाथी पूरी कर रहे - धान और टमाटर के साथ कई प्रकार के दलहन, तिलहन और मक्का तथा गन्ना उगाने वाले किसान बताते हैं, कि मौसम और कीट प्रकोप के इस महामारी के सहित अन्य परेशानियों के इस सबके बीच यहां विचरण कर रहे हाथियों के अलग-अलग झुंड जिले भर में पक चुके गोड़ा धान और अधपके धान, मक्का, और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे चौतरफा मार से किसान हलेकान और परेशान हैं और उन्हें ढाढस बंधाने वाला कोई नहीं है। वन विभाग ना तो हाथियों की आमद की सूचना देने में सक्षम रहा और ना जिले के लोगों की जान-माल और फसल को बचा पाने में अपना कोई सहयोग दे पा रहा है।

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