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YONO ऐप के नाम पर 2.33 लाख की ठगी, शातिरों ने वन विभाग के बाबू को ऐसे लगाया चूना, जानें पूरा मामला

Fraud News: शातिर जालसाजों ने योनो ऐप चालू कराने के नाम पर वन विभाग में पदस्थ एक बाबू को अपना निशाना बनाते हुए 2 लाख 33 हजार रुपए की ठगी कर ली।घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
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जशपुर

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Khyati Parihar

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Updated: 13 Apr 2026, 4:51 PM IST

YONO ऐप के नाम पर 2.33 लाख की ठगी (फोटो सोर्स- पत्रिका)

YONO ऐप के नाम पर 2.33 लाख की ठगी (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG Fraud News: जशपुर जिले के पत्थलगांव सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रो मे लगातार बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। एक बार फिर साइबर जालसाजों ने यहां वन विभाग में पदस्थ बाबू वीरेंद्र कुमार ठाकुर से, योनो एप चालू करने के नाम पर 2 लाख 33 हजार 222 रुपए की ठगी कर ली गई।

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, तिलडेगा निवासी वीरेंद्र कुमार ठाकुर, जो वन विभाग में सहायक ग्रेड 2 के पद पर पदस्थ हैं, का भारतीय स्टेट बैंक, पत्थलगांव शाखा में खाता संचालित है। उनके मोबाइल से, योनो सेवा जुड़ी हुई है। 10 अप्रैल की शाम अज्ञात कॉल कर जालसाजों ने एप चालू कराने का झांसा दिया, फिर अगले दिन सुबह वीडियो कॉल और एप डाउनलोड के माध्यम से खाते की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद खाते से तीन किश्तों में कुल 2.33 लाख रुपए निकाल लिए गए।

पीड़ित को जिला साइबर टीम से उम्मीद

लगातार सामने आ रही ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के बीच अब लोगों की उम्मीदें जिला साइबर टीम और आधुनिक डिजिटल जांच प्रणाली पर टिक गई हैं। पीड़ित विरेन्द्र कुमार ठाकुर ने वरिष्ठ जिला पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उम्मेद सिंह से गुहार लगाई है कि उसकी मेहनत की कमाई वापस दिलाई जाए एवं उसके साथ ठगी करने वाले अज्ञात जालसाजों को पकड़ कर ठोस कार्यवाही की जाए।

भाई की शादी के लिए जोड़कर रखे थे पैसे

पीड़ित ने बताया कि यह रकम उन्होंने अपने भाई के विवाह के लिए लंबे समय से मेहनत कर जोड़ी थी। अचानक पूरी राशि निकल जाने से परिवार आर्थिक संकट में आ गया है। पत्थलगांव और आसपास के क्षेत्रों में इससे पहले भी ओटीपी ठगी, एटीएम धोखाधड़ी, फर्जी लिंक, केवाईसी अपडेट और बैंकिंग एप के नाम पर कई साइबर अपराध सामने आ चुके हैं। लेकिन विगत अनेक मामलों में आज तक कोई ठोस खुलासा नही हो सका है। स्थानीय स्तर पर साइबर अपराधों की जांच के लिए साधनों की कमी के कारण अधिकतर मामले केवल शिकायत और प्रारंभिक विवेचना तक सीमित रह जा रहे हैं।

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में जागरूकता की कमी

शहर के अलावा आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रो मे बड़ी संख्या में भोलेभाले आदिवासी वर्ग के लोग रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रो में तेजी से बैंकिंग सेवाओं और मोबाइल एप का उपयोग तो बढ़ा है, लेकिन साइबर सुरक्षा और डिजिटल सावधानी को लेकर पर्याप्त जागरूकता अब भी नहीं पहुंच पाई है। यही कारण है कि जालसाज बैंक, केवाईसी, योनो, ओटीपी, इनाम या सरकारी योजना के नाम पर लोगों को आसानी से भ्रमित कर लेते हैं।

ग्रामीण परिवेश में रहने वाले कई लोग बैंकिंग प्रक्रिया और मोबाइल एप की तकनीकी बारीकियों से पूरी तरह परिचित नहीं होते, जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी बेहद शातिर तरीके से उन्हें फंसा लेते हैं। यही वजह है कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग अक्सर ऐसे अपराधियों का आसान निशाना बन जाते हैं।