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बिजली गुल फिर भी आ रहा बिल

पूरे गांव में विगत तीन महीने से अंधेरा छाए होने के बावजूद बिजली विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को बिल भेजा जा रहा है

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Kajal Kiran Kashyap

Jul 06, 2016

bijali bill

bijali bill

जशपुरनगर.
पूरे गांव में विगत तीन महीने से अंधेरा छाए होने के बावजूद बिजली विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को बिल भेजा जा रहा है। सीएसईबी के कर्मचारियों की इस हरकत से नाराज ग्रामीणों ने जनदर्शन में शिकायत कर बिल माफ कराने की मांग करते हुए नियमित रूप से बिजली आपूर्ति की गुहार लगाई है। मामला जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्राम केरे की है। पहाडिय़ों के बीच स्थित मनोरम दृश्यों के लिए जिले भर में मशहूर केरे ग्राम में बीते अप्रेल महीने से बिजली आपूर्ति ठप है। जिला मुख्यालय का नजदीकी ग्राम होने के बावजदू तीन महिना बीत जाने के बाद भी बाधित आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया है। आपूर्ति के संसाधन होने के बाद भी अधिकारियों की अनदेखी से जूझ रहे केरे के ग्रामीणों ने मंगलवार को कलक्टर जनदर्शन में दर्जनों की संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्या से अवगत कराया।


उन्होंने कलक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला से बगैर बिजली के भेजे जा रहे बिल में रोक लगाते हुए जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करवाने की गुहार लगाते हुए कहा, इस संबंध में पहले भी बिजली विभाग के अधिकारियों को सूचित किया कि उनके गांव में तीन महिने से बिजली गुल है। सूचना देने पर भी उसे नजर अंदाज कर दिया गया। बिजली विभाग के साथ ही जनप्रतिनिधियों और पंचायत सचिव से भी मामले की शिकायत कर जल्द से जल्द सुधार कराने और उपयोग के बिना आ रहे बिल को माफ कराने की मांग की गई थी। ग्रामीणों की मांगों को न ही ध्यान दिया गया है और न ही बिजली बिल भेजने पर रोक लगाई गई है। जनदर्शन में पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने केरे में व्याप्त बिजली संकट को दूर करने की मांग की है।


सुधार कार्य में बरती लापरवाही

केरे के दर्जनों ग्रामीणों ने कहा, उन्होंने बिजली गुल होने की शिकायत अप्रेल महीने में की गई थी। शिकायत को बिजली विभाग की ओर अनदेखी करते हुए मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा, विभागीय लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में बिजली आपूर्ति के संसाधन होते हुए आपूर्ति बाधित है। बावजूद इसके विभाग की ओर से बिल वसूलने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने जुलाई तक का बिल देने से इनकार करते हुए, आपूर्ति दुरूस्त करने की मांग की है।


47 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक

बिजली की मांग के साथ ही जनर्दशन में शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में अध्यनरत विद्यार्थियों के परिजनों ने अटैच शिक्षकों को स्कूल में भेजने की मांग की है। मनोरा विकासखंड के गेड़ई अम्बाकोना स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में वर्तमान में 47 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। यहां के लिए 3 शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। जिसमें से एक ही शिक्षिका नियमित रूप से शाला में उपस्तिथ रहती हैं। अन्य दो में से एक को संकुल समन्वयक बना दिया गया है। और एक शिक्षक 2014 से ही अनुपस्थित है। स्वीकृत पद भरे होने के बावजूद शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों को भविष्य अधर में लटक गया है।


एक ही शिक्षक उपस्थित

ग्रामीणों ने शिकायत की और बताया कि यहां पदस्थ तीन शिक्षकों में से एक रोशलीन केरकेट्टा नियमित 47 विद्यार्थियों को पढ़ाने आती है। वहीं विपिन विकास खरे को संकुल समन्वयक के पद पर बहेरना में बैठा दिया गया है। जबकि शिक्षिका भारती पटनायक सितंबर 2014 से अनुपस्थित है। इस बात को लेकर भी नाराजगी है।
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