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जब अटल ने की थी पंडित दीन दयाल उपाध्याय के चुनाव हारने की भविष्य़वाणी और वो भारी मतों से हार गये

किसी भी हाल में अपने मित्र राजदेव सिंह का विरोध नहीं कर सकते थे राजा जौनपुर

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जब अटल ने की थी पंडित दीन दयाल उपाध्याय के चुनाव हारने की भविष्य़वाणी और वो भारी मतों से हार गये

जावेद अहमद की रिपोर्ट...

जौनपुर. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से आज पूरा देश गम में डूबा है। उनसे जुड़ी तमाम यादें लोगों के आंखों से सामने आ रही हैं। ऐसे में उनसे जुड़े एक वाकये की चर्चा जौनपुर जनपद में भी खूब की जा रही है।

ज़िले के पुरनियों को 1963 का वो उपचुनाव याद आ रहा है जब अटल जी ने यहां एक सप्ताह तक डेरा डाले रखा था। जनसंघ के प्रत्याशी पंडित दीन दयाल उपाध्याय के लिए वोट मांगने वाजपेयी जी जौनपुर में आये थे। शहर की गलियों से लेकर गांव की पगडंडियों तक उन्होंने लोगों से संपर्क किया। लेकिन सप्ताह भर में ही चुनावी माहौल देखने के बाद उन्होने जनसंघ के उम्मीदवार पंडित दीन दयाल उपाध्याय से कह दिया कि पंडित जी आप चुनाव हार जायेंगे। हुआ भी वही परिणाम आया तो पंडित जी कांग्रेस के प्रत्याशी राजदेव सिंह से भारी मतों के अंतर से हार गये। उसी समय पंडित जी ने मान लिया था कि अटल विहारी एक दिन देश की बागडोर संभालेंगे।

जनसंघ का गढ़ था जौनपुर, ऐसे मिली शिकस्त

कहा जाता है कि जब पूरे देश में कांग्रेस की तूती बोलती थी तो जौनपुर ही एक मात्र ऐसा जिला था जहां जनसंघ को 10 सीटों में से छह-सात सीटों पर जीत मिल जाती थी। ऐसे में 1963 का लोकसभा उपचुनाव हुआ। जनसंघ ने अपने मजबूत गढ़ होने की वजह से अपने सबसे बड़े नेता दीन दयाल उपाध्याय को चुनाव लड़ाने का फैसला किया। उन दिनों राजा जौनपुर य़ादवेन्द्र दत्त दूबे जनसंघ के स्टार प्रचारक थे। उन्ही के आश्वासन पर पंडित जी ने चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया।

कांग्रेस के दांव में फंसा जनसंघ

यहीं कांग्रेस ने बड़ा दांव खेल दिया। हुआ यूं कि राजा जौनपुर यादवेन्द्र दत्त दूबे और राजदेव सिंह घनिष्ठ मित्र थे। दोनों की दांतों काटी रोटी थी। कांग्रेस को पता था कि राजा जौनपुर कभी भी राजदेव सिंह का विरोध कर ही नहीं सकते। ऐसे में कांग्रेस ने राजदेव सिंह को उम्मीदवार बना दिया। राजा अब फंस चुके थे। उनके साथ ही पंडित जी और जनसंघ भी मझधार में था। राजा साहब न्यूट्रल हो गये। वो किसी भी हाल में अपने मित्र राजदेव सिंह का विरोध नहीं कर सकते थे। परिणाम ये हुआ कि पंडित जी अकेले पड़ गये। इधर अटल जी ने देखा और पंडित जी से कह दिया कि आप चुनाव हार जायेंगे। परिणाम आये तो कांग्रेस के राजदेव सिंह ने पंडित जी को भारी मतों से हरा दिया।

बेहद करीबी थे कपिल वर्मा

जहांगीराबाद मोहल्ला निवासी पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वर्गीय कपिल वर्मा उनके परम मित्रों में रहे। वर्मा जी और अटलजी ने दिल्ली में एक साथ पत्रकारिता की थी। जिले के कई नेताओँ से अटलजी की नज़दीकियां रही । जिसमें राजा यादवेन्द्रदत्त दुबे, उमानाथ सिंह , आरएसएस के कार्यकर्ता शशिकांत वर्मा समेत करीब 10 लोग शामिल रहे।

अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी थे वाजपेयी

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय पत्रकारिता एवं जनसंचार के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्र ने कहा कि अटलजी सच्चे अर्थों में भारत के अजातशत्रु सपूत और अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी थे । उनका सपूर्ण जीवन राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए दुनियां के विकसित राष्ट्रों के अवरोधों की भी कभी परवाह नहीं की। उनका कहना था कि हमें कभी विपदाओं, तूफानों, बवंडरों और अफवाहों की परवाह किए बिना मिलकर रहना चाहिए, इसी में राष्ट्र का कल्याण है। सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों से हंसते-हंसते ,आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।