निर्वाचित हुए सालभर हो गया, लेकिन राशि के अभाव में विकास कार्य नहीं करवा पा रहे21 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा, 15 दिन में सुनवाई नहीं हुई तो सरकारी कार्य का बहिष्कार करने की चेतावनी
झाबुआ. शासन भले ही पंचायतों को सशक्त बनाने का दावा करे, लेकिन हालात पूरी तरह से जुदा है। निर्वाचन को सालभर से ज्यादा समय बीतने के बावजूद राशि के अभाव में सरपंच अपनी पंचायत में विकास कार्य ही नहीं करवा पा रहे हैं। लोग कुछ बोलते हैं तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता। ऐसे में पेटलावद क्षेत्र की 77 ग्राम पंचायतों के सरपंच मंगलवार को जिला मुख्यालय आ गए। यहां उन्होंने जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव के सामने अपनी बात रखी। साथ ही 21 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। सरपंचों ने साफ कह दिया कि 15 दिन में उनकी मांगों को नहीं माना जाता तो सरकारी कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा।
जनता को जवाब नहीं दे पा रहे
सरपंचों को उम्मीद थी कि जीतने के बाद वेे क्षेत्र में विकास की गंगा बहा देंगे। परंतु वे एक भी काम नहीं कर पा रहे हैं। उधर जनता का उन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। जनता को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। रही सही कसर जिला पंचायत द्वारा 15वें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की राशि पर अग्रिम भुगतान के लिए रोक लगा देने से पूरी हो गई। कई बार मुद्दा उठाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो सरपंच जिला मुख्यालय पर आ गए। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें पंचायत स्तर पर कार्य करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
15वें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की राशि पर अग्रिम भुगतान के लिए लगाई गई रोक के आदेश को वापस लिया जाए।
सरपंचों की ये हैं प्रमुख मांगें
-पंचायत के नए निर्माण कार्यों की स्वीकृति जनपद स्तर से की जाए। साथ ही प्रत्येक पंचायत में एक एक सुदूर सडक़ की मंजूरी दी जाए।
-प्रधानमंत्री आवास का लक्ष्य जारी करने के साथ ही छूटे नामों के लिए आवास पोर्टल शीघ्र खोला जाए।
-7 दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री के द्वारा सरपंचों के महासम्मेलन में की गई घोषणा को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
-मनरेगा में नवीन जॉब कार्ड सक्रिय करने और मुखिया परिवर्तन करने का अधिकार ग्राम पंचायत को दिया जाए।
-ग्राम पंचायत में मनरेगा अंतर्गत 20 कार्यों की बाध्यता समाप्त की जाए।
-आबादी भूमि का निपटारा करने का अधिकार ग्राम पंचायत को पुन: वापस दिए जाएं
-मनरेगा आधारित कार्यों में मजदूरी व सामग्री अनुपात की राशि की बाध्यता को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही कार्य पूर्ण होने के उपरांत सामग्री भुगतान 15 दिन में किया जाए।