
गोबर की राखियां-अब रक्षाबंधन पर भी इको फ्रैंडली राखी
रक्षाबंधन पर भी इको फ्रैंडली तरीके से मानने के लिए कुछ महिलाओं ने गोबर की राखियां बनाना शुरू कर दिया है, गोबर की राखियां सुनने में तो अजीब लगता है, लेकिन वास्तविकता में ये राखियां काफी आकर्षक होती हैं। क्योंकि गोबर की राखी सूखने के बाद उस पर रंग रोगन करने के साथ ही सजावट करने के बाद वह काफी आकर्षक हो जाती है। इस बार रक्षा बंधन पर आपको गोबर की राखियां भी देखने को मिलेगी।
रक्षाबंधन के लिए बाजार सजने लगा है। तरह- तरह की राखियां भी आ गई है। इस बार कुछ खास है तो वह है गोमाता के गोबर से तैयार इकोफ्रेंडली राखी। इसे बनाया मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में शहर के बाबेल कंपाउंड में स्थित ऑल इन वन आर्ट्स ग्रुप की संचालक योगिता पांडे ने। उद्देश केवल यही है कि लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हों। उन्होंने इस तरह की करीब 500 राखी तैयार की है।
दरअसल रक्षाबंधन पर्व के लिए बाजार में बिकने वाली राखियां प्लास्टिक, पन्नी और अन्य धातुओं या ऐसी वस्तुओं से निर्मित होती है, जिनसे पर्यवारण पर कहीं न कहीं कुछ असर जरूर पड़ता है। त्योहार के बाद कई लोग इन राखियों को तालाब या नदी में भी प्रवाहित कर देते हैं, ताकि इनका अनादर न हो। लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि इससे जल प्रदूषण की समस्या भी पैदा हो जाती है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस समस्या को देखते हुए योगिता ने कुछ ऐसा करने का प्रयास किया, जिससे भाई- बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके। चूंकि वे गो सेवा संघ से जुड़ी हैं और दिवाली के समय वे गोबर के दीपक बना चुकी थी, जिसे लोगों का खासा समर्थन मिला था। ऐसे में योगिता ने गोमाता के गोबर से ही आकर्षक राखी तैयार करने का निर्णय लिया। उन्होंने 500 से अधिक इको फ्रेंडली राखी तैयार भी कर ली। जिन्हें नाम मात्र की राशि पर प्रदान किया जाएगा। जिससे लोग प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ सके ।
Published on:
14 Aug 2023 03:46 pm

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