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फसल की नीलामी नहीं होने से लुट रहे किसान, टैक्स चोरी से शासन को नुकसान

जिन मंडी कर्मचारियों को बोली लगाने की जिम्मेदारी दी, वे ट्रैफिक कंट्रोल कर रहे थे, जबकि किसानों को व्यापारी कंट्रोल कर रहे थे

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फसल की नीलामी नहीं होने से लुट रहे किसान, टैक्स चोरी से शासन को नुकसान

फसल की नीलामी नहीं होने से लुट रहे किसान, टैक्स चोरी से शासन को नुकसान

झाबुआ. मंडी प्रशासन की लापरवाही से किसानों को जमकर लूटा जा रहा है। साथ ही मंडी टैक्स बिना चुकाए खरीदारी होने से शासन को व्यापारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। सालभर से चल रही अनियमितता को सुधारने के लिए पिछले सप्ताह एसडीएम ने औचक निरीक्षण किया था।

उस दौरान उन्होंने व्यापारियों को मंडी में ही व्यापार करने एवं बोली लगाने के आदेश दिए थे, लेकिन आदेशों का असर एक सप्ताह भी नहीं रहा। रविवार को शहर में लगभग 16 स्थानों पर खरीदी की गई। व्यापारियों ने इस बार भी बोली नहीं लगाई। किसानों को अपने हिसाब से दाम दिया।
मंडी परिसर फिर से अव्यवस्थाओं से पटा रहा। एसडीएम के आदेशों को नजरअंदाज कर मंडी प्रशासन अपने पुराने अंदाज में नजर आया। मंडी प्रशासन एवं व्यापारियों द्वारा खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही थी। जिन कर्मचारियों को बोली लगाने की जिम्मेदारी दी गई वे ट्रैफिक कंट्रोल कर रहे थे। किसानों को व्यापारी कंट्रोल कर रहे थे। इसका नतीजा रहा कि मंडी में रविवार को एक बार फिर से बोली नहीं लगी। सौदा पत्रक के बिना खरीदी होती रही। किसानों को कपास का कम दाम मिला। कपड़े, कटलरी, नाश्ते की दुकान लगी थी। किसान सुबह 6 बजे मंडी पहुंच गए। व्यापारियों ने भी 7 बजे से खरीदी शुरू की। 10 बजे तक तो मंडी में 500 क्विंटल कपास खरीदा। इसके बाद मंडी कर्मचारी डयूटी पर पहुंचे।

कपास में तीन हजार रुपए से ज्यादा का नुकसान
किसान वसना मडिय़ा ने बताया कि 7 क्विंटल कपास 4600 के भाव से बेची। कल राणापुर में बोली लगने की वजह से मेरे दामाद विष्णु का 3 क्विंटल कपास का 4 हजार 9 सौ रुपए का भाव मिला। कपास अच्छे भाव में बेचने की लालच में बड़ी मंडी लाया, लेकिन यहां कपास में तीन हजार रुपए से ज्यादा का नुकसान हो गया। छितू सिंह भूरिया ने बताया कि 4 क्विंटल कपास 4700 रुपए के हिसाब से बेचा, लगातार भाव कम होते जा रहे। बोली नहीं लगाने से व्यापारी एक होकर भाव कम कर देते हैं। मजबूरी में व्यापारियों द्वारा तय किए भाव में कपास बेचना पड़ा।

व्यापारियों ने किसानों को जमकर लूटा
व्यापारियों की मानें तो मंडी में करीब 1700 क्विंटल कपास की आवक रही। डीसीएच कपास के भाव 6400 रुपए जो पिछले सप्ताह से 200 रुपए क्विंटल ज्यादा रहे तो वही एमसीएच कपास में व्यापारियों ने किसानों को जमकर लूटा। 4900 के एमसीएच कपास को व्यापारी द्वारा 4600 से 4700 रुपए में खरीदा। व्यापारी एमसीएच कपास एवं डीसीएच कपास की मिक्सिंग के लिए डीसीएच कपास को ऊंचे भाव में खरीदते हैं। वहीं एमसीएक्स कपास को कम भाव में खरीद कर डीसीएच में मिक्स कर देते हैं। बदनावर के जिनिंग फैक्ट्री मनजीत कॉटन में डीसीएच कपास का भाव 6600 रुपए एवं एमसीएच कपास का भाव 5100 रुपए दिया जा रहा है।

केके दिनकर मंडी सचिव से सीधी बात
एसडीएम के आदेश के बाद भी डेढ़ साल से बोली नहीं लग रही है?
बोली तो हम भी लगवाना चाहते हैं, लेकिन किसान कम अनाज लेकर पहुंच रहे हैं। 10 किलो 20 किलो अनाज की बोली कैसे लगाएं।
नियमानुसार बोली लगाने वाले स्थान पर सौदा पत्रक बनाए जाने चाहिए। मंडी के बाहर भी खरीदी होती रही?
दिखवाता हूं।