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अफसरों ने एक महीने में १० करोड़ के पहाड़ काटकर बिकवा दिए!

तहसीलदार की जांच रिपोर्ट बदली, जिसमें कहा था कि हजारों टन गिट्टी खनन कर अवैध तरीके से बेची गई

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अफसरों ने एक महीने में १० करोड़ के पहाड़ काटकर बिकवा दिए!

झाबुआ. जिले में पहाडिय़ों की कटाई कर बेचने के मामले में अफसरों और खनिज माफिया के गठजोड़ का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। शहर से सटे रतनपुरा की पहाडिय़ों को काटकर महज एक माह में 10 करोड़ की बोल्डर गिट्टी बेची गई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सालों से चल रहे गोरखधंधे में कितने पहाड़ काटे गए होंगे। मई 21 से जून 21 तक पांच हजार डम्पर गिट्टी पहाडिय़ों से निकाली गई। एक डम्पर गिट्टी की बाजार कीमत 20 हजार रुपए है। अफसरों ने इस अवैध खनन में जांच रिपोर्ट तक बदल दी, इसमें कहा गया था कि पहाडिय़ों को माफिया ने बिना किसी अनुमति के काटा है। इस पर भारी जुर्माना किया जाए। यह जुर्माना 30 करोड़ तक का हो सकता है।

तहसीलदार ने 7 जून को रतनपुरा में दीपेश सोनी से पहाडिय़ां काट रहे वाहन जब्त किए थे। उसके पास किसी भी तरह की अनुमति नहीं मिली थी। तहसीलदार ने जांच रिपोर्ट में लिखा था कि 1.८१ हेक्टेयर एरिया विकसित करना है। यहां तो सभी पहाडिय़ों को तालाबनुमा बना दिया। असंख्य डम्परों से हजारों टन बोल्डर गिट्टी बेची गई। इसकी कीमत करोड़ों रुपए है। इसका बाजार मूल्य निकालकर जुर्माना लगाया जाए। 30 फीट तक की पहाडिय़ां समतल कर तालाब बना दी। अवैध खनन के साथ अवैध परिवहन के तहत कार्रवाई की जाए। इस रिपोर्ट को एसडीएम ने बदल दिया। एसडीएम ने पटवारी के नेतृत्व में खनिज सर्वेयर को मौके पर भेजा। पटवारी ने पंचनामा में खनन नहीं होने की रिपोर्ट बना दी। इससे साफ हो जाता है कि अफसर किस तरह इस गोरखधंधे में माफियाओं से मिलकर पहाड़ों को बेच रहे हैं।

खनन करने वालों को समझाइश देकर मामला खत्म
तहसीलदार के आदेश को बदलकर एसडीएम ने 13 जून को नया जांच दल बना दिया। खास बात ये है कि इस दल में पटवारी नानूराम मेरावत के नेतृत्व में खनिज विभाग को जोड़कर नया दल बना दिया। दल ने पंचनामा बनाया और किसी बाहरी व्यक्ति को शामिल नहीं किया। अवैध खनन कर रहे लोगों की बात को सही ठहरा कर मामला खत्म कर दिया। पंचनामे में परिवर्तित भूमि सर्वे नंबर -०६/1 रकबा ०.१८० हेक्टेयर परिवर्तित लगान 1440 रुपए, 7 / 1 रकबा -0. १८० हेक्टेयर परिवर्तित लगान 1440 रुपए। सर्वे नंबर- 7 / 2 रकबा ०.७२० परिवर्तित लगान ५६६० रुपए। सर्वे 8 / 1 रकबा -०.१८६ हेक्टेयर परि. लगान -1440 रुपए। सर्वे 8/2 रकबा -०.७२० हेक्टेयर परिवर्तित लगान ५७६० रुपए की भूमि भू स्वामी अंजू पति प्रमोद भंडारी, महिपाल पिता नरेंद्र सिंह, पद्मा पति महिपाल, मोहित, मयंक पिता महिपाल रुनवाल की बताई गई। पटवारी ने पंचनामा बनाया कि पुराना गड्ढा था। इसकी लंबाई ५८ मीटर, चौडा़ई ४२ मीटर, गहराई ३ मीटर पाई गई। मौके पर भू स्वामी मयंक रुनवाल ने बताया कि भूमि को समतल किया है। सर्वे 4, 5, ९ में किसी तरह की खुदाई नहीं की है। पटवारी ने ये रिपोर्ट एसडीएम को दे दी। जिस पर एसडीएम ने खनन करने वालों को कानून का पालन करने की समझाइस देकर मामला खात्मे के आदेश दे दिए।

वाहनों को राजसात करने की बनी थी रिपोर्ट
तहसीलदार ने पहाडिय़ां काट रही पोकलेन एचपी जेड ए 4529, पोकलेन क्रं एचपी सीएस 200 एलसी, जेसीबी एमपी 11 जी 3510, डम्पर आरजे 09 जीबी 6 8 13, डम्पर आरजे 09 जीएच ६६१३, डम्पर एमपी 09 एचजी ६१७६ को जब्त किया था। साथ ही रिपोर्ट में कहा कि इन वाहनों को राजसात किया जाए, लेकिन एसडीएम ने बिना जुर्माने के इन वाहनों को छोडऩे के आदेश दे दिए।
क्या कहता है कानून
मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 247 (८.ई) के तहत भूमि भले ही किसी की निजी हो। ऊपरी सतह को छोड़कर भूमि के अंदर की पूरी गौण संपदा संपत्ति शासन की होगी। इस नियम को ताक पर रखते हुए रतनपुरा की पहाडिय़ों पर शनिवार को भी खनन जारी रहा। जहां पर पहाड़ों को लगातार काटकर डम्परों से परिवहन कर बेचा जा रहा है। यह सब सभी को दिख रहा है पर जिला प्रशासन के अधिकारियों को नहीं। पहाड़ों की कटाई में एक मोटा हिस्सा अफसरों की जेब में जा रहा है इससे तो यही साबित हो रहा है।
7 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था
पहाडिय़ों की कटाई कर कई सालों से बेचा जा रहा है। इसकी शिकायतें मिलने पर भी अफसरों ने कोई कदम नहीं उठाए। हर बार देखने-दिखवाने की बात ही कहते रहे। 31-05-2011 में पहली बार तत्कालीन एसडीएम एसके लहरी ने खनन करने पर 7 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। तब से लेकर आज तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।
जांच दल की रिपोर्ट पर आदेश दिए
जांच दल की रिपोर्ट पर आदेश दिए हैं। जांच में खनन होना नहीं पाया गया। कानून का पालन करने की समझाइश देकर वाहन छोड़े हैं।
-केसी परते, एसडीएम।
30 फीट तक ऊंची पहाडिय़ां काटकर बेची
मौके पर जाकर रिपोर्ट बनाई थी। पहाडिय़ों को मशीनों से खोदकर तालाबनुमा बना दिया है। 30 फीट तक ऊंची पहाड़ी काटकर बेची है। इसकी कोई अनुमति नहीं थी। वाहनों को राजसात करने भी जांच रिपोर्ट में लिखा था। करोड़ों रुपए का अवैध खनन हुआ है।
-बीएस भिलाला, तहसीलदार।