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‘गुरु की आराधना से आत्मा को सुखी बना सकते हैंÓ

चातुर्मास कलश की स्थापना आज

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Shruti Agrawal

Jul 06, 2017

jhabua

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झाबुआ. ऋषभदेव बावन जिनालय में चातुर्मास के तहत आचार्य भगवंत कविरत्न विद्याचंद्र सूरीश्वर एवं आचार्य रवींद्र सूरीश्वर के सुशिष्य आचार्य विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वर विराजित है। गुरुवार को वचनों में आत्मा का शुद्धिकरण एवं तप तथा ध्यान के महत्व को प्रतादित किया गया।


सुबह 9 बजे से बावन जिनालय की नई धर्मशाला में प्रवचनों का सिलसिला शुरू हुआ। सर्वप्रथम गुरूवंदन की विधि श्रावकरत्न धर्मचंद्र मेहता ने संपन्न करवाई। इसके बाद रजतचंद्र विजय एवं जिनचंद्र विजय ने शंखेश्वर पाश्र्वनाथ भगवान के मधुर स्तवनों की प्रस्तुति देकर प्रवचनों की शुरुआत की। मुनि रजतचंद्र विजय ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देव एवं गुरु की आराधना से हम अपनी आत्मा को सुखी बना सकते हैं। संसार में यदि कोई भी बाधा आती है, तो उन्हें जिनवाणी से दूर करना चाहिए। हम अपने शरीर को संसार के अनेक भौतिक संसाधनों से सुखी बनाने का प्रयास करते रहते हंै, लेकिन शरीर को सुखी करने के लिए धर्म और प्रार्थना जरूरी है। आत्मा की शुद्ध परमात्मा के ध्यान से ही संभव है। जीवन में धर्म का होना जरूरी है। श्रद्धा परम् र्दुलभ तत्व है। तप त्याग से मीठा लगता है। जीवन में धर्म का होना जरूरी है। धर्म से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। नशाखोरी करने वाला व्यक्ति भी यदि धर्म को थोड़ा सा भी मान ले और धर्म के नियमों का पालन करेे तो उनका जीवन भी सुधर सकता है।
चातुर्मास समिति के संरक्षक अभय धारीवाल ने बताया कि आचार्य देवेश ऋषभचंद्र सूरीश्वर आदि ठाणा-5 एवं साध्वी रत्नरेखा श्रीजी आदि ठाणा-3 के चातुर्मास की कलश स्थापना शुक्रवार को सुबह 9 बजे ऋषभदेव बावन जिनालय के नई पोशधशाला भवन में की जाएगी। श्री संघ के वरिष्ठ मनोहर मोदी एवं संतोष जैन ने बताया कि विशिष्ट आराधनों में सामूहिक रूप से 44 दिवसीय सिद्धि-तप का भव्य आयोजन होगा। इसके साथ ही चार्तुमास के तहत श्री नमस्कार महामंत्र की नौ दिवसीय आराधना, पयूर्षण पर्व की विषिष्ट आराधना, नवपद ओलीजी के नौ दिवसीय आयोजन होगा। पूज्य आचार्य श्रीजी द्वारा विशिष्ट अवसरों पर सर्वसिद्धिदायक महा मांगलिक प्रदान की जाएगी। इस तरह चार माह में शहर में धर्म की गंगा बहेगी। चातुर्मास के तहत 9 जुलाई को गुरुपूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। यह जानकारी श्री संघ के युवा रिंकू रूनवाल ने दी।
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