हालत ऐसे कि तालाब, कॉलोनियां, सार्वजनिक स्थलों पर जमा हो रहा कचरा
झाबुआ. शहर के 18 वार्डों में सफाई के नाम पर हर माह 20 लाख रुपए कर्मचारियों के वेतन भत्ते , कचरा वाहनों के डीजल और अन्य सफाई संसाधनों के ऊपर खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी शहर के चौराहे , सार्वजनिक स्थल , तालाब के किनारे , यहां तक कि कलेक्टोरेट में भी कचरे के ढेर देखे जा रहे हैं। गली -मोहल्लों में कचरा वाहन के माध्यम से कचरा एकत्रीकरण कर उसका निष्पादन बखूबी किया जा रहा है, लेकिन कुछ मोहल्लों में सडक़ के किनारे भी कचरे के ढेर लगे हैं। यही कारण है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर लगातार पिछड़ रहा है। इस वर्ष भी इसी तरह का हाल रहा तो नपा को सर्वेक्षण में रैंक सुधारने और अधिक अंक जुटाने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
जहां मर्जी वहां कचरा फेंक रहे
शहर के तीनों प्रमुख तालाबों के आसपास , बड़े नालों में , चौराहों पर , कलेक्टोरेट परिसर में, खाली भूखंड में जिसकी जहां मर्जी वहां कचरा फेंक रहे हैं। शहर में जगह-जगह अघोषित कचरा एकत्रीकरण पॉइंट बना दिए गए हैं। इसमें गोपाल कॉलोनी में स्मार्ट प्वाइंट के सामने, मंगल भवन के सामने , कलेक्टोरेट में खेल परिसर के पास, मारुति नगर और सुखदेव विहार कॉलोनी के बीच में तालाब की रपट पर, भारी मात्रा में कचरा एकत्रित किया जा रहा है। जबकि घर-घर कचरा लेने वाले वाहन चलाए जा रहे हैं , लेकिन फिर भी लोग सडक़ पर कचरा फेंक रहे हैं , नगर पालिका ने इनसे कभी जुर्माना वसूल नहीं किया । सडक़ पर कचरा फेंकने के संबंध में नियम होने के बावजूद, शहर की जनता द्वारा यहां-वहां पर कचरा फेंकने के लिए कभी जुर्माना भी नहीं लगाया गया। स्वच्छता के प्रति लोग जागरूक नहीं होने के कारण शहर भर में कचरा दिखाई दे रहा है।
195 सफाई कर्मी में से 80 नियमित
नगर पालिका के 195 कर्मचारियों में आधे से भी कम नियमित
कर्मचारी हैं। नगर पालिका में कुल 80 कर्मचारियों को नियमित मानते हुए 12000 प्रति माह का वेतन मिल रहा है, तो वहीं 115 सफाई कर्मी कंटीजेंसी पर लगे हैं, जिन्हें 7000 रुपए प्रति माह का वेतन दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 15 वाहनों में डीजल का खर्च भी हो रहा है। मोटे तौर पर नगरपालिका एक माह में 20 लाख रुपए तक खर्च कर रही है , लेकिन सफाई कहीं दिखाई नहीं दे रही। नगर पालिका को शहर में कचरा फेंकने वालों पर सख्ती से जुर्माना वसूलना होगा।
प्रभारी फोन भी नहीं उठाते
कुछ दिन पहले शहर में स्वच्छता प्रभारी का दायित्व एसपी दुबे को सौंपा गया है, लेकिन यह शहर में ही नहीं रहते। कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों के फोन ना उठाने की शिकायतें भी हो रही है। ऐसे में बिना स्वच्छता प्रभारी के शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है।