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मन के आकाश में विचारों के पक्षी दौड़ते हैं…कवियों की दिल लुभाने वाली रचनाएं

कवियों एवं समाज में विशेष योगदान के लिए लोगों का सम्मान किया गया

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झाबुआ

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Amit Mandloi

Jun 20, 2018

kavi sammelan

मन के आकाश में विचारों के पक्षी दौड़ते हैं...कवियों की दिल लुभाने वाली रचनाएं

झाबुआ. राजपूत मित्र मंडल के तत्वावधान में महाराणा प्रताप की 478 वी जयंती हर्षोउल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर रामकृष्ण नगर के नर्मदा-झाबुआ ग्रामीण बैंक के चौराहे पर विराट कवि सम्मलेन का आयोजन हुआ। सम्मलेन के सूत्रधार अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के जिला संयोजक भेरूसिंह चौहान थे। कवियों ने महाराणा प्रताप पर केंद्रित वीर रस की कविताओं के साथ ही हास्य व श्रृंगार की रचनाओं से श्रोताओं को सराबोर कर दिया।
गौरी कटारा ने सरस्वती वंदना विद्या की देवी सरस्वती मां विद्या का दान हमें कर दो मां के साथ मरना प्रताप पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। डॉ. रामशंकर ने मन के आकाश में विचारों के पक्षी दौड़ते है दूर-सुदूर किसी सुख को प्राप्ति की लालसा में वे भूल जाते हैं कि आकाश में सिर्फ उड़ा जा सकता है, नई कविता से सबका मन मोह लिया।
भेरूसिंह चौहान ने नमन करें हम शौर्य पुत्र को उनके स्वाभिमान को, याद करें हम मिलकर सारे राणा के बलिदान को वीर रस की कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर समा बांध दिया। साथ ही हास्य रस की रचनाओं से गुदगुदाया। सुरेश समीर ने नई चेतना की सरिता में आओ आज नहाए हम महाराणा के साधक बन जीवन सफल बनाए हम वाह-वाही लूटी। मनोज जैन ने सीमा पर आके ना कभी तुमने ये होते देखा है वीर रस की रचनाओं के साथ ही श्रृंगार की रचनाए सुनाई। प्रवीण कुमार सोनी ने गम के रास्तों पर ख़ुशी से मुलाकात करता हूं कविता प्रस्तुत की। जगदीश राघव ने जय-जय महाराणा प्रताप काल के आगे बन जाते थे महाकाल से आप वीर रस के साथ ही श्रृंगार रस की रचनाओं से सभी को बंधे रखा। गणेश प्रसाद उपाध्याय ने संचालन करते हुए सम्राट पृथ्वीराज सिंह चौहान पर केंद्रित वीर रस की कविताओं को सराहा गया।
आमंत्रित कवियों में डॉ. रामशंकर, गणेश प्रसाद उपाध्याय, सुरेश समीर, मनोज जैन, भेरूसिंह चौहान, प्रवीण कुमार सोनी , जगदीश राघव एवं गौरी कटारा मंचासीन थे। धीरजसिंह पंवार एवं आमंत्रित कवियों ने महाराणा प्रताप के चित्र पर मालयार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। सम्मलेन के प्रारंभ में पंकज चौहान के माता-पिता सत्यनारायण सिंह चौहान व सुमित्रा चौहान को उनके पुत्र ने सेना में विशेष सहयोग के लिए एडवोकेट रुक्मणि वर्मा को योग एवं राजपूत समाज के नि: शुल्क न्यायालय के प्रकरण लडऩे तथा आयुषसिंह चौहान को जुडो कराटे में विशेष योगदान व भूमिका निर्वहन करने के लिए प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मान किया। कवियों को प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।

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