
गिरफ्तार आरोपी और साइबर ठगी के लिए प्रयोग की गई सामग्री (फोटो: पत्रिका)
Cyber Crime Gang Busted: झालावाड़ जिले में साइबर अपराध पर बड़ा प्रहार करते हुए भवानीमंडी पुलिस ने करोड़ों रुपए की ठगी से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में ठगी को अंजाम देने वाले इस नेटवर्क में शामिल तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और इसके तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में एक भवानीमंडी व्यापार महासंघ में महामंत्री पद पर है।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक ट्रांजेक्शन की जांच और गोपनीय सूचना के आधार पर संदिग्ध खातों की पहचान की। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी फर्मों और आम लोगों के बैंक खाते पैसे देकर खरीदते या किराए पर लेते थे और उन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करते थे।
जांच के बाद पुलिस ने रामनगर निवासी ललित राणा पुत्र दिनेश राणा, अजय विश्वकर्मा पुत्र बद्रीलाल तथा पचपहाड़ निवासी राजेश कुमार पुत्र रमेशचंद्र को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 53 एटीएम कार्ड, 35 चेक बुक, 6 बैंक पासबुक, 9 सिम कार्ड, एक लैपटॉप और 1 लाख 54 हजार 800 रुपए नकद बरामद किए हैं। गिरोह बड़ी संख्या में खातों का संचालन कर संगठित तरीके से ठगी कर रहा था।
सीआई प्रमोद कुमार के अनुसार आरोपी ठगी की रकम को एक ही खाते में नहीं रखते थे, बल्कि उसे तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे। बाद में एटीएम और अन्य माध्यमों से नकदी निकाल ली जाती थी, जिससे जांच एजेंसियों को ट्रांजेक्शन ट्रेस करने में मुश्किल होती थी।
पुलिस उपाधीक्षक प्रेम कुमार चौधरी ने बताया कि इन खातों से जुड़े कई राज्यों में साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपए के लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिससे अंदेशा है कि गिरोह बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा है।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों में राजेश राठौड़ भवानीमंडी व्यापार महासंघ में महामंत्री पद पर है। पुलिस के अनुसार वही इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसके और अन्य खातों के पिछले 5 वर्षों के लेनदेन की जांच की जा रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अपने बैंक खाते किसी भी अनजान व्यक्ति को किराए पर न दें और न ही किसी लालच में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करें। ऐसा करना आपको सीधे साइबर अपराध में शामिल कर सकता है।
Published on:
11 Apr 2026 10:49 am
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