
झालावाड़ जिले में सर्दी का सीतम जारी है। सोमवार को दोपहर शीतलहर व कोहरा रहा। दोदिन बाद दोपहर साढ़े बाहर बजे सूर्य के दर्शन होने से लोगों ने सर्दी से राहत महसूस की।लोग धूप में बैठे नजर आए। शहर में सोमवार को न्यूनतम तापमन 6 डिग्री व अधिकतम 19 डिग्री रहा।
झालावाड़ मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के आधार पर एवं जिले में अगले कुछ दिनों तक लगातार शीत लहर, बारिश की संभावना के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ द्वारा झालावाड़ जिले के राजकीय व निजी विद्यालयों में संचालित कक्षा 1 से 8 वीं तक के समस्त छात्र-छात्राओं का मंगलवार से 10 जनवरी तक अवकाश घोषित किया गया है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामसिंह मीणा ने बताया कि यह अवकाश सिर्फ विद्यार्थियों के लिए लागू होगा शेष स्टाफ (शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक) यथावत कार्य करेगें। उक्त आदेश की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के प्रावधानो के तहत नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
झालावाड़ जिले में इन दिनों शीतलहर व कड़ाके की सर्दी का सीतम जारी है। ऐसे में तेज सर्दी के चलते जिले में चर्मरोग के मामले भी तेजी से बढ़ गए है। जिले के मेडिकल कॉलेज व जिला चिकित्सालय झालरापाटन में चर्म रोगों के मरीजों की संख्या सर्दियों में सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 40 फीसदी तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार कोहरा, ठंडी व सूखी हवा, गाजर घास का संपर्क और त्वचा की गलत देखभाल इसके प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि सर्दियों में हवा में नमी बहुत कम हो जाती है। यह सूखी हवा धीरे-धीरे त्वचा से नमी खींच लेती है, जिससे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है और खुजली, जलन, रेशे तथा संक्रमण आसानी से हो जाते हैं।
सर्दियों में लोग कोहरे के बीच निकलने वाली हल्की धूप में देर तक बैठते हैं और यह मान लेते हैं कि जब गर्मी महसूस नहीं हो रही तो धूप नुकसानदेह नहीं होगी। जबकि वैज्ञानिक तथ्य यह है कि सूरज की पराबैंगनी किरणें (यूवी किरणें) सर्दियों में भी उतनी ही सक्रिय रहती हैं।इसी कारण एक्टिनिकडर्मेटाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें चेहरे, गर्दन और हाथों पर लालिमा, जलन, सूजन और काले धब्बे पड़ जाते हैं।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम पाटीदार के दौरान सबसे अधिक जिन समस्याओं के मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें रूखी त्वचा, लगातार खुजली, होंठों और एड़ियों का फटना, ड्राई एक्ज़िमा, सोरायसिस का बढ़ जाना, अटोपिक डर्मेटाइटिस, इक्कथियोसिस,बच्चों और बुज़ुर्गों में एलर्जी तथा हाथ-पैर की उंगलियों में तीव्र खुजली प्रमुख हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी, दमा या सोरायसिस की समस्या होती है, उनमें सर्दियों में लक्षण अधिक गंभीर हो जाते हैं।
बहुत गर्म पानी से नहाना, नहाने के काफी देर बाद क्रीम लगाना, सर्दियों में सनस्क्रीन का उपयोग बंद कर देना, ऊनी कपड़े सीधे त्वचा पर पहनना, हीटर या ब्लोअर के सामने लंबे समय तक बैठना तथा खुजली होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉइड क्रीम लगाना ये सभी आदतें त्वचा को और अधिक नुकसान पहुंचाती है।
सही जानकारी, समय पर सावधानी और जन-जागरूकता से सर्दियों में होने वाली अधिकांश त्वचा समस्याओं से बचा जा सकता है। गाजरघास मुक्त स्वस्थ झालावाड़ अभियान के अंतर्गत जिले में आयोजित किए जा रहे जागरूकता सत्र एवं परामर्श शिविर आमजन को त्वचा रोगों से बचाव और सही उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीण इनमें आकर अपनी परेशानी बता सकते हैं।
डॉ. शुभम पाटीदार,चर्म रोग विशेषज्ञ, जिला नोडल अधिकारी।
जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में त्वचा रोगों से बचाव, सही उपचार तथा गाजर घास से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सके। जिले में कई जगह किसानों के खेतों में गाजर घास के संपर्क में आने से त्वचा एलर्जी, खुजली, आंखों में जलन और सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती है।
डॉ. साजिद खान, सीएमएचओ, झालावाड़।
Published on:
06 Jan 2026 11:34 am
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