
हर बार किसानों को होता है नुकसान
झालावाड़. जिले की मंडियों में पर्याप्त शेड नहीं होने से किसानों के खरे पसीनें से कमाई हुई फसलें बेमौसम बारिश में मंडियों में ही खराब हो रही है। जबकि मंडियों में लगे शेड में व्यापारियों को माल जमा रहता है। जिले में सोमवार को व उससे तीन दिन पूर्व आई बारिश में भी कई किसानों की जिंस मंडियों में पानी के साथ बहकर चली गई। अगर जिले की प्रमुख मंडियों में पर्याप्त शेड हो तो हर बार किसानों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
जिले की सबसे बड़ी हरिशचन्द्र कृषि उपज मंडी झालरापाटन में इन दिनों गेहूं, अलसी, धनियां, सरसों आदि जिंस आ रही है। लेकिन पर्याप्त शेड नहीं होने से जैसे ही बेमौसम बारिश होती है, किसानों की मंडी प्रांगण में फैली फसल खराब हो जाती है।
जिले के रायपुर व भवानीमंडी कृषि उपज मंडियों में शेड कम है। उनमें भी व्यापारियों का माल जमा रहता है।ऐसे में नीलामी के लिए किसानों को अपनी उपज खुले में डालनी पड़ती है। ऐसे में नीलामी से पूर्व बारिश आने से नुकसान किसानों का ही होता है। गेहूं की हो रही बंपर आवक- किसानों ने बताया कि मौसम खराब हो जाने से किसान अपनी उपज को जल्दी से जल्दी तैयार कर बेचने के लिए मंडी में लाने में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही इस वर्ष गेहूं का सबसे ज्यादा उत्पादन हुआ है इसलिए मंडी में सबसे अधिक आवक गेहूं की हो रही है। समर्थन मूल्य का तौल कांटा भी झालरापाटन कृषि उपजमंडी में ही लगा होने से इसमें बिकने के लिए आ रहे गेहूं का तोल भी यहां पर ही हो रहा है। जिससे मंडी परिसर के बड़ा भाग इनके उपयोग में आ रहा है। जिससे किसानों और व्यापारियों को अपनी जींस रखने के लिए स्थानाभाव की परेशानी आ रही है।
किसानों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों खूब शादियां होती है। जिससे भी गांव में अधिकांश किसान अपनी उपज को जल्दी से जल्दी बेचकर शादी का सामान खरीदते है, इसलिए भी उपज की आवक एक साथ हो रही है।
खरीब व रबी सीजन में जब भी बेमौसम बारिश होती है, मंडी में नुकसान किसानों को ही होता है। रायपुर मंडी में सोमवार को गेहूं लेकर गए थे, तेज बारिश से खराब हो गए। यहां पर्याप्त शेड की आवश्यकता है।
रायपुर मंडी में शेड के अभाव में किसानों को काफी नुकसान होता है। सरकार को किसानों की उपज की नीलामी के लिए यहां पर्याप्त शेड लगाना चाहिए। ताकि किसानों की पूरे साल की मेहनत बेकार नहीं जाएं।
कृषि उपज मंडी में किसानों का माल खराब नहीं हो, इसके लिए त्रिपाल मंगवा रहे हैं। शेड की कमी तो है, इसके लिए सरकार को सूचना भेज दी है। समर्थन मूल्य का माल भी यहीं तुल रहा है, इसलिए थोड़ी परेशानी आ रही है। आड़तियों की भी जिम्मेदारी है कि जो किसान उनके पास माल लेकर आ रहा है, उनका माल बेमौसम बारिश में खराब नहीं हो।
Published on:
07 May 2025 11:04 am
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