
- 8 लाख चल चुकी बसें भी दौड़ रही सड़कों पर
- नई मिले तो हो सुगम यात्रा
झालावाड़.पिछले एक दशक में रोडवेज की बसें आधी रह गई और जो बची है, उनमें से भी 30 प्रतिशत खटारा है, जो कभी यात्रियों को बीच रास्ते में अटकाकर खड़ी हो जाती है। राजस्थान परिवहन निगम के बस बेड़े में मात्र 2900 बसें रहने से निगम की हालत गड़बड़ाई हुई है। इन बसों में भी करीब 863 बसें कंडम श्रेणी की है। फिर भी यात्रियों की जान जोखिम में डाल इन्हे भी मार्ग पर चलाया जा रहा है, जबकि वर्ष 2016 तक निगम के बस बेड़े में 5700 बसें थीं। सरकार ने 500 नई बसें खरीद की है, हालांकि 800 बसें अनुबंध पर ली गई है। रोडवेज निगम में बसों की कमी से यात्रियों से लेकर कर्मचारियों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निगम को प्रदेशभर के लिए करीब 3000 बसों की आवश्यकता है। सरकार ने महज 1300 गाडिय़ों का प्रबंध किया है। इनमें भी 300 बसें इलेक्ट्रिक रहेंगी, बड़े शहरों के लिए चलेगी। कुल मिलाकर बसों की कमी से रोडवेज को घाटा भी झेलना पड़ रहा है। और यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
निगम से मिली जानकारी के अनुसार मार्ग पर चलाने के लिए रोडवेज की बस आठ साल से पुरानी या 9 लाख किलोमीटर से ज्यादा नहीं चली होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में बस को कंडम घोषित करने की सिफारिश की जाती है। बस संचालन से दुर्घटना का अंदेशा रहता है। वर्तमान में लंबी दूरी की ज्यादातर बसों में बैटरी, वायरिंग गियर की समस्या आ रही है। ये समस्या तेज गर्मी में और बढ़ जाती है। ऐसे में अक्सर चालक एवं परिचालकों को बीच राह आगार के वर्कशॅाप में बसों को जांच करानी पड़ती है। झालावाड़ में तो कई बार निजी वर्कशॉप कोतवाली के सामने बसों को सही करवाया जाता है। यह होनी चाहिए व्यवस्था- रोडवेज सूत्रों ने बताया कि कर्मचारी संघ की ओर से प्रतिवर्ष 1 हजार नई बस खरीदने, संचालन घाटे की पूर्ति के लिए 1200 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष बजट में प्रावधान करने और निगम को 6000 करोड़ की पैकेज राशि जारी करने की मांग की गई है। कर्मचारी संघ समय-समय पर रोडवेज को अपनी कई मांगों के लिए अवगत कराता है।
प्रदेश में रोडवेज की नकारा बसों के मॉडल
- 2012- 141
- 2014-10
- 2015- 17
- 2016-492
- 2017-263
2010-1
2013-13
- निगम में कुल नाकारा बसें-863
- निगम में कुल बसों की संख्या- 2900
- निगम मेंकुल अनुबंधित बसों की संख्या- 872
- झालावाड़ में कुल बसे-51
-नई बसों की जरूरत-30
हां प्रदेश में बसों की कमी तो है। झालावाड़ डिपो की 13 बसे ज्यादा चल चुकी है, इनके प्रस्ताव बनाकर आज ही भेजे हैं। वहां से अनुमति आने के बाद कंडम बसों को केन्द्रीय वर्कशॉप अजमेर भेजा जाएगा।
Updated on:
29 Mar 2025 11:42 am
Published on:
29 Mar 2025 11:41 am
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