
भव्य बनेगा जैन मंदिर, दूर-दूर से आएंगे लोग दर्शन करने
पिड़ावा. धर्मनगरी में सकल दिगम्बर जैन समाज का आस्था का केंद्र नवनिर्मित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन जूना भव्य मंदिर अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है। समाज के बुजुर्गों ने बताया कि जूना मंदिर लगभग 700 वर्ष पुराना था। मुनि भूतबलि सागर महाराज ससंघ ने जिसका ङ्क्षजनोदार करवाया गया। नवीन मंदिर का निर्माण 2018 से शुरू हुआ। नवनिर्मित मंदिर निर्माण में लगभग चार करोड़ की लागत लगी। इस मंदिर का भव्य पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव 8 मई से 13 मई तक आयोजित किया जाएगा। जिसमे कई आकर्षण के केंद्र होंगे। नवनिर्मित मंदिर में 3 विशालकाय शिखर बनाए गए है। जो मंदिर की भव्यता को और अभी बड़ा रहे है। भव्य पंचकल्याण महोत्सव की तैयारियां पूरे नगर में जोरों शोरों से चल रही है।
भव्यता का प्रतीक
धर्मनगरी पिड़ावा की पावन धरा पर खंडूपूरा में 1008 श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर का भव्य निर्माण वर्ष 2018 से अनवरत चल रहा है। जो अपनी पूर्णता की ओर है। जिसका भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 8 में से 13 मई को होगा। मन्दिर में दूर दूर से कारीगरों ने अपनी दिव्य कलाकृति का प्रदर्शन किया है। मन्दिर में मकराना का सफेद पत्थर, वियतनाम का सफेद पत्थर व उदयपुर का पत्थर भी लगाया है। यह मंदिर पूरे सफेद मार्बल से निर्मित है। 3 मंजिला इमारत नगर में भव्यता का प्रतीक है।
जिले की सबसे ऊंची प्रतिमा
इस मन्दिर की सबसे खास विशेषता मन्दिर में विराजमान पारसनाथ भगवान की प्रतिमा है। जो पद्मासन स्थिति में है। जिसकी ऊँचाई 7 फीट 3 इंच है। यह झालावाड़ जिले की सबसे ऊंची प्रतिमा है। यह प्रतिमा वियतनाम पत्थर से निर्मित है। यह विले पार्ले मुम्बई की प्रतीकृति की वेदी में विराजमान है। नव मंदिर निर्माण कार्य में राजस्थान स्थापत्य की सभी कलाओं को मिश्रित किया गया है। मंदिर के विशालकाय शिखर में हाड़ौती शैली दिखाई देती है। जिनको बूंदी के कारीगरों ने बनाया है। मंदिर की वेदियां मारवाड़ क्षेत्र के मकराना के कारीगरों द्वारा बनाई गई है। मंदिर में पेंङ्क्षटग का कार्य मालवा के कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। यह मन्दिर कोटा संभाग के भव्य मंदिरों में से एक है। पिड़ावा नगरी में जैन समाज का व अन्यत्र समाज का आस्था का केन्द्र है।
ये होंगे पांच कल्याणक
जैन ग्रन्थों के अनुसार वे पांच मुख्य घटनाएं हैं जो सभी तीर्थंकरों के जीवन में घटित होती हैं। पहला कल्याणक है गर्भ कल्याणक जब तीर्थंकर प्रभु की आत्मा माता के गर्भ में आती है। भगवान के गर्भ में आने से छह माह पूर्व से लेकर जन्म पर्यन्त 15 मास तक उनके जन्म स्थान में कुबेर द्वारा प्रतिदिन तीन बार साढ़े तीन करोड़ रत्नों की वर्षा होती है। यह भगवान के पूर्व अर्जित कर्मों का शुभ परिणाम है।दूसरा कल्याणक है जन्म कल्याणक जब तीर्थंकर बालक का जन्म होता है। भगवान होने वाली आत्मा का जब सांसारिक जन्म होता है तो देवभवनों व स्वर्गों आदि में स्वयं घंटे बजने लगते हैं और इंद्रों के आसन कम्पयमान हो जाते हैं। यह सूचना होती है इस घटना की कि भगवान का सांसारिक अवतरण हो गया है। सभी इंद्र व देव भगवान का जन्मोत्सव मनाने पृथ्वी पर आते हैं।
तीसरा कल्याणक है दीक्षा कल्याणक जब तीर्थंकर सब कुछ त्यागकर वन में जाकर मुनि दीक्षा ग्रहण करते है।
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में मुख्य पात्र
माता पिता, सौधर्म इन्द्र, कुबेर इन्द्र, महायज्ञ नायक, प्रथम पालना झूला कर्ता, आहर दानकर्ता श्रेयांश राजा, भरत, बाहुबली, ईशान इन्द्र, सनत इन्द्र, माहेन्द्र इन्द्र, महामंडलेश्वर, ध्वजारोहणकर्ता, शुक्र इंद्र, लांतव इंद्र, ब्रह्म इंद्र, आनत इन्द्र, प्राणत इंद्र, अच्युत इंद्र, ब्रह्मोत्तर इंद्र, महाशुक्र इंद्र, प्रतींद्र, मुख्य कलश स्थापना कर्ता, मंडप उदघाटन कर्ता प्रकाश, नीलांजना, आदि कुमार, लोकन्तिक देव, अष्ट कुमारीयां, आरण इंद्र, महा शुक्र इन्द्र, सहस्त्रार इंद्र, प्रतीन्द्र सामान्य इन्द्र, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, समवशरण उद्घाटनकर्ता, दीपक स्थापना कर्ता, मुकुट बद्धराजा, लोकतान्तिक देव, प्रमुख बाल सखा, बाल क्रीड़ा बालक, अग्नि कुमार देव, 56 कुमारियां आदि पात्र होंगे।
Published on:
21 Apr 2022 04:51 pm
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