
Shanti Bai Gurjar (Patrika Photo)
भवानीमंडी (झालावाड़): झालावाड़ जिले के भवानीमंडी क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी कुएं के पास रहने वाली 70 वर्षीय शांति बाई गुर्जर उर्फ शाणी बहन पिछले 56 वर्षों से अन्न का एक भी दाना खाए बिना जीवन व्यतीत कर रही हैं। वे दिन में चाय और रात में केवल दूध पीकर ही जिंदा हैं।
शांति बाई ने बताया कि उनकी शादी लालसोट के पास एक गांव में हुई थी। ससुराल जाने के बाद उनकी तबीयत खराब रहने लगी। भोजन करने पर स्वास्थ्य बिगड़ जाता था, जिसके चलते धीरे-धीरे उन्होंने खाना छोड़ दिया।
परिजन के अनुसार, स्वास्थ्य में आए बदलाव के बाद उनकी ठोस आहार में रुचि पूरी तरह समाप्त हो गई। अब वे दिन में 7-8 बार चाय और रात में करीब आधा किलो दूध पीती हैं और इसी से दिनभर काम करती हैं।
भाई रामलाल गुर्जर ने बताया कि शांति बाई ने चार भैंसें पाल रखी हैं। वे सुबह पांच बजे उठकर करीब तीन किलोमीटर पैदल खेत तक आती-जाती हैं। पशुओं की देखभाल, दूध-घी बेचने और खेती का सारा काम खुद करती हैं। बिना भोजन के भी वे आम महिलाओं से अधिक काम करती हैं। उन्हें खाना बनाने का शौक है और वे परिवार के लिए मक्का व बाजरे की रोटियां बनाती हैं। वे दो बार पार्षद भी रह चुकी हैं।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार शरीर को जीवित रहने के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और विटामिन की आवश्यकता होती है, जो केवल दूध और चाय से पर्याप्त मात्रा में मिलना कठिन है। बिना ठोस आहार के लंबे समय तक जीवित रहना एक दुर्लभ स्थिति है।
-डॉ. रवि काबरा, फिजीशियन, उप जिला अस्पताल, भवानीमंडी
Updated on:
11 Jan 2026 04:31 am
Published on:
11 Jan 2026 04:30 am
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