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Jhalawar top crime news : ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा के लिए बदमाशों को देना पड़ रहा सेफ्टी टैक्स

यह टेक्स ग्रामीणों के साथ साथ अब शहरी क्षेत्र में कॉलोनी में रहने वाले लोगों से आपराधिक तत्व के लोग वसूलते हैं। 

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झालरापाटन नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में वारदात नहीं करने की एवज में आपराधिक तत्व (जरायमपेशा लोग) सेफ्टी टैक्स वसूलते हैं। वर्षों से चोरी, लूट और डकैती की वारदात से प्रभावित जिले में बीते कुछ सालों में ग्रामीणों से एक अनोखा और अनचाहा टैक्स वसूला जाता है, जिसे चौकीदारी टैक्स या सेफ्टी टैक्स भी कहा जाता है। यह टेक्स ग्रामीणों के साथ साथ अब शहरी क्षेत्र में कॉलोनी में रहने वाले लोगों से आपराधिक तत्व के लोग वसूलते हैं।

झालरापाटन नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में वारदात नहीं करने की एवज में आपराधिक तत्व (जरायमपेशा लोग) सेफ्टी टैक्स वसूलते हैं। वर्षों से चोरी, लूट और डकैती की वारदात से प्रभावित जिले में बीते कुछ सालों में ग्रामीणों से एक अनोखा और अनचाहा टैक्स वसूला जाता है, जिसे चौकीदारी टैक्स या सेफ्टी टैक्स भी कहा जाता है। यह टेक्स ग्रामीणों के साथ साथ अब शहरी क्षेत्र में कॉलोनी में रहने वाले लोगों से आपराधिक तत्व के लोग वसूलते हैं। 

एक तरफ जहां प्रदेश के मुखिया बदमाशों और माफिया को जड़ से उखाड़ फेंकने की बात कह रहे हैं वहीं दूसरी ओर झालावाड़ जिले के ग्रामीणों के लिए जरायमपेशा लोग आतंक का पर्याय बन चुके हैं। खेतों और कल कारखानों पर लगी विद्युत मोटर, बाइक, गाय और भैंस चुरा लेने और उसके बाद दलालों के माध्यम से रूपयों की वसूली करने वाले ये लोग गांव में चोरी की कोई वारदात नहीं करने की एवज में प्रत्येक किसान से अनाज और रूपए की मांग करते हैं, वही हफ्ता वसूली नहीं देने वाले किसानों के साथ मारपीट और उनके सामान चोरी करने की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। 

मुख्यधारा से जाेड़ने के लिए योजना,पर नहीं जुड़ रहे

झालावाड़ जिले में अपराधिक प्रवृत्ति के जरायमपेशा लोगों का आतंक अब भी जारी है। राजस्थान सरकार और सामाजिक न्याय विभाग ने ऐसे लोगों को अपराध छोड़कर समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए विभिन्न योजनाएं भी चला रखी है, लेकिन झालावाड़ जिले में मध्य प्रदेश से लगे हुए हिस्से में आज भी ये लोग चोरी और लूट जैसी अपराधिक गतिविधियों में लिप्त है और फिल्मों की तर्ज पर सेफ्टी टैक्स वसूल रहे हैं। झालरापाटन के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में इनके डेरे बहुतायत तौर पर बसे हुए हैं जो जिले के कस्बों और गांवों के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश तक जाकर चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं।

आतंक से परेशान लोग

नगर परकोटा के बाहर इंदौर मार्ग स्थित आवासीय कॉलोनी में रहने वाले परिवार बताते हैं कि उन्हें भी इन लोगों को सेफ्टी टैक्स देना पड़ता है, जिससे वह सुरक्षित रह पा रहे हैं। यह लोग इसे चौकीदारी प्रथा बताते हैं और कहते हैं कि ग्रामीणों को फसल और सामान की सुरक्षा की एवज में रुपए देने होंगे अन्यथा गांव में चोरी की घटनाएं होने लगेगी। इनके आतंक से परेशान लोग सेफ्टी टैक्स के रूप में रुपए और फसल आने पर अनाज भी देते हैं, वहीं क्षेत्र में किसी भी सामान की चोरी होने पर कंजरो से जुड़े हुए दलाल सक्रिय हो जाते हैं और चोरी हुए सामान को वापस दिलाने के लिए डील करवाते हैं।

झालरापाटन सहित आसपास के क्षेत्र में पुलिस रात के समय गश्त करती है और ऐसे लोगों पर लगातार निगाह रखी जाती है। सेफ्टी टैक्स देने के बारे में उनके पास अभी तक किसी ने शिकायत नहीं की है, शिकायत मिलने पर इस पर कार्रवाई की जाएगी।

हंसराज मीणा थानाधिकारी झालरापाटन