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अब कॉलेज दाखिले में जाति प्रमाण-पत्र बना रोड़ा

ऑनलाइन दाखिले का अंतिम दिन आज

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अब कॉलेज दाखिले में जाति प्रमाण-पत्र बना रोड़ा

अब कॉलेज दाखिले में जाति प्रमाण-पत्र बना रोड़ा

झालावाड़./ हरिसिंह गुर्जर 12 वीं पास कर कॉलेज दाखिले का सपना देख रहे कई छात्रों के सपने चूर हो सकते हैं। कॉलेज आयुक्तालय इस बार छात्रों के ३ तीन साल पुराने व बिना डिजिटल हस्ताक्षर वाले जाति प्रमाण-पत्र स्वीकार नहीं कर रहा है। राजकीय महाविद्यालयों से नियमित पढ़ाई कर स्नातक करने वाले छात्रों से अब डिजिटल हस्ताक्षर वाले जाति प्रमाण-पत्र ही स्वीकार किए जा रहे हैं। कॉलेजों में दाखिले के लिए २५ जून अंतिम तिथि है। ऐसे में प्रदेशभर की बात करें तो ऐसे छात्रों की संख्या लाखों में होगी जिनका आवेदन पत्र डिजिटल नहीं होने की वजह से रद्द किए जा रहे हैं। सरकार ने २० अक्टूबर २०१५ के बाद तहसीलदार से बनवाया गया जाति प्रमाण-पत्र अमान्य घोषित कर दिया है। अब उपखंड अधिकारी व अतिरिक्त जिला कलक्टर स्तर के अधिकारियों द्वारा बनवाया गया जाति प्रमाण-पत्र ही स्वीकार किया जाएगा।
समाज कल्याण ने भेजा आयुक्तालय को आदेश-
पीजी कॉलेज के प्रवेश प्रभारी डॉ.हामीद अहमद ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने शैक्षणिक सत्र २०१८-१९ के लिए आरक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को ही स्वीकार करने के निर्देश दिए है। राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व विशेष पिछड़ा वर्ग अब एमबीसी वर्ग के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के ९ सितंबर २०१५ व २० अक्टूबर २०१५ के निर्देशों की पालना करने के निर्देश दिए है। इस तिथि के बाद तहसीलदार के हस्ताक्षर से जारी जाति प्रमाण-पत्र मान्य नहीं किएजा रहे हैं। इसके लिए उपखंड अधिकारी व अतिरिक्त जिला कलक्टर द्वारा जारी डिजिटल हस्ताक्षर का जाति-प्रमाण ही मान्य होंगे।

रद्द होगा या सामान्य श्रेणी में डाला जाएगा-
जिन छात्रों के जाति प्रमाण पत्र ३ साल पुराने है या नया होने के बाद भी तहसीलदार के हस्ताक्षर वाला है तो छात्रों का आवेदन मान्य नहीं होगा। ऐसे में कॉलेजों में ऑनलाइन सत्यापन के दौरान छात्रों के आवेदन रद्द किए जाएंगे या सामान्य श्रेणी में डाले जाएंगे। ऐसे में जिन छात्रों के कम अंक होंगे वह सामान्य श्रेणी की कट ऑफ में नहीं आएंगे तो उनका प्रवेश नहीं हो पाएगा। अभी ऑनलाइन आवेदन चेक करने का काम चल रहा है। ऐसे में जिले में करीब ११०० छात्र स्नातक में प्रवेश से वंचित हो सकते हैं। प्रदेशभर की बात करें तो यह आंकड़ा लाखों की संख्या में पहुंच सकता है। कॉलेज द्वारा फोन कर सूचना भी दी जा रही है। छात्रों के सामने इतने कम समय में जाति प्रमाण पत्र की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।

एक सप्ताह देरी से शिक्षण कार्य-
पूरी गर्मी में कॉलेज आयुक्तालय प्रवेश नीति बनाने में व्यस्त रहता है। इसके बावजूद भी इस वर्ष शिक्षण कार्य एक सप्ताह की देरी से शुरू होगा। इसके बाद भी २१जुलाई तक रिक्तों सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया चलेगी। ऐसे में पुरा जुलाई माह प्रवेश में ही निकल जाएंगा।

इतने छात्र होंगे प्रवेश से वंचित-
राजकीय पीजी महाविद्यालय में इस बार जाति प्रमाण पत्र के अभाव में करीब ४०० छात्रों के आवेदन रद्द हो जाएंगे। वहीं जिलेभर के महाविद्यालयों में करीब ११ छात्रों को नियमित प्रवेश के लाभ से वंचित रहना होगा। कॉलेज आयुक्तालय से जब कट ऑफ जारी होगी तो कई छात्र प्रवेश से वंचित हो जाएंगे।

अंतिम तिथि आज
- आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि -25 जून
-सत्यापन की अंतिम तिथि -26 जून
- अंतरिम वरीयता व प्रतीक्षा सूची का प्रकाशन-27 जून
-मूल प्रमाण पत्रों की जांच करवाने की ंअंतिम 4 जुलाई
-ई-मित्र कियोस्क पर शुल्क जमा कराने की अंतिम तिथि- 5 जुलाई
-प्रवेशित छात्रों की प्रथम सूची का प्रकाशन-6 जुलाई
- महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू 7 जुलाई से


इतनी सीटों पर होगा प्रवेश
पीजी महाविद्यालय
संकाय सीटें आवेदन आए
कला 800 2211
वाणिज्य 80 214
बीएससी विज्ञान 140 655
बीएससी गणित 70 424
कुल 1090०
3504
इतनी सीटों पर होगा प्रवेश
पीजी कन्या महाविद्यालय
संकाय सीटें आवेदन आए
कला 160 959
बीएससी विज्ञान 70 307
बीएससी गणित 70 103
कुल 300 1369

छात्रों की यह पीड़ा है-
१.जाति प्रमाण पत्र नया बनवा लेंगे लेकिन अभी तो सरकार को जो प्रमाण-पत्र लगाया उसे ही स्वीकार करना चाहिए। सरकार से हमारी मांग है कि छात्रों का नुकसान नहीं हो इसके लिए सभी छात्रों का जाति प्रमाण-पत्र तीन साल पुराना है तो भी स्वीकार करना चाहिए। ताकि छात्रों का भविष्य खराब नहीं हो।
विजेन्द्र चौधरी, बीए छात्र खिमच।
२.जब तक उपखंड अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र नहीं बनता है। तब तक पुराने से ही कॉलेज में प्रवेश देना चाहिए। एक तरफ तो सरकार उच्च शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। दूसरी और जाति प्रमाण-पत्र के अभाव में छात्रों के साथ दोखा किया जा रहा है। प्रमाण पत्र बनवाने में समय लगता है। कॉलेज आयुक्तालय को पहले बताना चाहिए था।
दिनेश कुमार बीए छात्र बिन्दा।
३.एमबीसी के छात्रों का ऑनलाइन आवेदन में ऑफ्शन ही नहीं आ रहा है। इस लिए एसबीसी ही भरा है। जाति प्रमाण पत्र भी एसबीसी का लगाया है। अब एमसीबी का बनकर आएगा तब ही नया लगा पाएंगे। ऐसे में एमबीसी के छात्रों को नियमानुसार कॉलेज दाखिले में प्रवेश देना चाहिए। ताकि छात्रों को कॉलेज शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिल सके।
राहुल गुर्जर, बीए छात्र झालरापाटन

यह बोले जिम्मेदार-
जिन छात्रों को कॉलेज प्रवेश में आरक्षण का लाभ लेना है। वह सोमवार तक ई-मित्र पर जाकर दुबारा फॉर्म भर देंवे। उसके साथ जाति-प्रमाण पत्र की रसीद लगा देंवे।
डॉ.दिनेश तिवारी, सहायक आयुक्त कॉलेज शिक्षा, कोटा।