
Kalisindh Thermal Power Project,...थर्मल में उत्पादन ठप, झालावाड़ के अर्थचक्र पर संकट
झालावाड़. कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट में कोयला संकट गहरा गया है, इससे दोनों इकाईयां पिछले 11 दिन से ठप पडी है। थर्मल में उत्पादन ठप होने के दूरगामी परिणाम झालावाड़ के लिए घातक साबित हो सकते हैं। उत्पादन ठप होने से झालावाड़ और झालरपाटन का अर्थचक्र गड़बड़ाने की आशंका है। इससे व्यापारिक वर्ग में भी चिंता की लकीरें खींचने लग गई है। थर्मल से प्रत्यक्ष रूप से दो हजार से अधिक कर्मचारी व अधिकारी जुटे हुए हैं। पांच हजार से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इन कार्मियों के वेतन का पैसा सीधा बाजार में आता है। इससे झालावाड़ और झालरपाटन के बाद में धन का प्रवाह बढ़ता है। इससे बाजार गुलजार होते हैं। 11 दिन से थर्मल में सन्नाटा छाया हुआ है। जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की दोनों इकाइयों में कभी ट्यूब लीकेज तो कभी कोयला नहीं होने जैसी परेशानियां आम है। जबकि कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट आधुनिक तकनीक पर बना राजस्थान का पहला पावर प्लांट है। ऐसे में एक साल में कई बार दोनों यूनिट का बंद होना अति आधुनिक तकनीक पर सवाल खड़े करता हैं। ये 600-600 मेगावाट का पहला थर्मल है जो आधुनिकतम चीन तकनीक पर बना हुआ है। इसमें बीजीआर कंपनी द्वारा डोंग-फोंग कपंनी का जनरेटर, टरबनाइन, बायलर सहित कई उपकरण लगाए गए है। ऐसे में करोड़ों रूपए चाइना की कंपनी पर खर्च होने के बाद भी बार-बार किसी ने किसी कारण से बंद होने से थर्मल घाटे में जा रहा है। ऐसे में थर्मल में काम करने वाले करीब 2025 अधिकारी, कर्मचारी व श्रमिकों के वेतन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उधर बिजली संकट कके चलते जिलेभर में अघोषित विद्युत कटौती शुरू हो गई है। जनता बेहाल है। जानकारों का कहना है कि राज्य में सरकारी बिजली घरों में एक बार फिर से कोयला संकट गहरा गया है। इससे बिजली उत्पादन खासा प्रभावित हो रहा है। प्रदेश के सभी बिजलीघरों में कोयला खत्म होने से प्रतिदिन करीब 5 लाख यूनिट से अधिक बिजली महंगे दाम में खरीदना ऊर्जा विभाग की मजबूरी बनी हुईहै। सूत्रों ने बताया कि कालीसिंधथर्मल को भेजे जाने वाले कोयले के पूर्व के करीब 350 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया चल रहा है। इसके चलते परेशानी आ रही है। सूत्रों ने बताया कि कालीसिंध थर्मल के लिए तीन रैक आने की उम्मीद जताई गई है। लेकिन आने के बाद ही पता चलेगा कि थर्मल को कितने रैक कोयले की मिलती है। पहली बार ऐसा हुआ है कि थर्मल की दोनों यूनिट कोयले के अभाव में बंद हुई हो गईहै। इससे पहले दोनों यूनिट बॉयलर ट्यूब लीकेज व अन्य तकनीकी खामी की वजह से कई बार बंद हुईहै। लेकिन कोयले की वजह से पहली बार बंद हुई है। कालीसिंथ थर्मल के ठप होने से करमियाखंड़ी, निमोदा, सिघानिया, कलमंड़ी, खानपुरिया, उंडल आदि गांवों के लोगों को रोजगार मिल रहा है तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से राख ले जाने वाले कई लोग प्रभावित हो रहे हैं। इन दिनों थर्मल के ठप रहने से करीब 5 हजार से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं।कालीसिंध थर्मल की पहली व दूसरी इकाई 11 दिन से बंद है। ऐसे में एक यूनिट से 24 घंटे में 144 लाख यूनिट उत्पादन होता है। ऐसे में कालीसिंध थर्मल को एक दिन में कराड़ों का नुकसान हो रहा है। एक यूनिट की लागत करीब 4.6 रुपए मानी जाती है तो भी थर्मल को एक दिन में करीब 6 6 2.4 लाख का नुकसान होता है, ऐसे 11 दिन में थर्मल को करीब 60 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। वहीं दोनों यूनिट के बंद होने से प्रति दिन 288 लाख यूनिट का नुकसान हो रहा है। सूत्रों ने बताया कि थर्मल को एक बार में लाइट अप करने में करीब 20 लाख का खर्चा आता है, ऐसे में 11 दिन से बंद दोनों यूनिट को फिर से चालू करने में लाखों रूपए का खर्चा होगा।
टोटल स्कैन
- कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास 3.9.2008 को तत्कालीन सीएम वसुन्धरा राजे ने किया। इसका टैंडर हुआ 9.7.2008 को मैसर्स बीजीआर एनर्जी सिस्टम चैन्नई को।
- प्रथम यूनिट से वाणिज्यिक उत्पादन 7.5.2014 को शुरू
- दूसरी यूनिट से 25.7.2015 को उत्पादन शुरू हुआ।
- जमीन 8 42 बीघा सरकारी, 1388 बीघा निजी भूमि।
- 1400 बीघा जमीन में कन्ट्रक्शन।
- 600-6 00 मेगावाट की दो यूनिट।
- 12 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है थर्मल, पांच गांवों की सीमा में।
- एशिया का सबसे बड़ा कूलिंग टावर, ऊंचाई 202 मीटर।
- कुल प्रोजेक्ट कोस्ट 9479.51 करोड़
- थर्मल में टेक्निकल व नॉन टेक्निकल स्टाफ -425 है
- सिक्यूरिटी, कांट्रेक्ट लेबर आदि -1600
Published on:
28 Aug 2021 12:34 pm

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