3 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डीएपी खाद के लिए धक्का खा रहे धरतीपुत्र

झालावाड़.जिले में दीपोत्सव के बाद इन दिनों रबी बुवाई ने जोर पकड़ लिया है। जिले में कई स्थानों पर किसानों ने कुछ फसलों की बुवाई कर दी है। वहीं कई स्थानों पर बुवाई की जा रही है। ऐसे में खाद की भी आवश्यकता होने लगी है। बुवाई को लेकर भूमिपुत्र भी खेतों में व्यस्त हो […]

3 min read
Google source verification

झालावाड़.जिले में दीपोत्सव के बाद इन दिनों रबी बुवाई ने जोर पकड़ लिया है। जिले में कई स्थानों पर किसानों ने कुछ फसलों की बुवाई कर दी है। वहीं कई स्थानों पर बुवाई की जा रही है। ऐसे में खाद की भी आवश्यकता होने लगी है। बुवाई को लेकर भूमिपुत्र भी खेतों में व्यस्त हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर अभी आवश्यकता के अनुसार डीएपीखाद नहीं मिल रहा है। हालांकि अभी रेलणी का दौर चल रहा है। जिससे प्रमुख रूप से डीएपी की आवश्यकता पड़ रही। लेकिन कई जगह पर खाद की कमी होने से किसानों को एनपीके व एसएसपी से ही काम चलाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि जिले में रबी बुवाई का दौर शुरू हो गया है। इस बार जहां पानी की उपलब्धता होने से गेहूं का रकबा भी बढ़ेगा। वहीं बुवाई के दौरान अधिकांश फसलों में डीएपी की आवश्यकता होती है। लेकिन अधिकांश इलाकों में डीएपी की कमी है। जिससे किसानों को अन्य खाद का उपयोग करना पड़ रहा हैै। वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग का कहना है कि बुवाई के आधार पर प्रति माह के लिए मांग के आधार पर खाद की उपलब्धता के लिए संबंधित विभाग और कंपनियों से आपूर्ति करवाई जा रही है।जिले में रबी में नवंबर माह में 4 हजार एमटी के मुकाबले मात्र 450 एमटी खाद ही आया है। अन्य जिलों के मुकाबले झालावाड़ जिले में डीएपी की आपूति कम हो रही है। किसानों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों को किसानों की समस्या पर ध्यान देकर पर्याप्त खाद मंगवाना चाहिए।

गेहूं-सरसों की बुवाई अधिक-

जिले में इन दिनों किसान वर्ग खेतों में व्यस्त है, किसान रबी फसल की बुवाई में जुटे हुए है। कहीं हंकाई की जा रही है, तो कहीं खेतों में बुवाई की जा रही है। ऐसे में किसान वर्ग अपने खेत-कुओं पर दिनभर कार्य करने में जुटे हुए है। इस बार गेहूं, सरसो, मैथी,लहसुन, अलसी आदि फसलों की बुवाई अधिक की जा रही है। इसके साथ ही कुछ जगह खेतों में नमी को देखते हुए मसूर व चना की बुवाई भी की गई है। जिले में इस बार गेहूं की बुवाई का 1 लाख 30 हजार व सरसों 60 हजार हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है।

रबी में नवंबर माह में खाद की स्थिति

खाद मांग उपलब्धता

यूरिया 20000 15000

डीएपी 4000 450

एनपीके 5000 2000

एमओपी 300 850

एसएसपी 20000 28000

योग 49300 46300

(आंकड़े कृषि विभाग के अनुसार एमटी में)

जिले में रबी सीजन में बुवाई का लक्ष्य

फसल लक्ष्य हैक्टेयर

गेहूं 130000

चना 55000

मसूर 8000

सरसों 60000

अलसी 5000

अन्य फसलें 70000

कुल 328000

मांग के अनुरूप नहीं मिल रहा डीएपी-

गौरतलब है कि जिले में दीपावली के बाद से ही रबी की बुवाई ने जोर पकड़ लिया है। इससे अभी विशेषकर डीएपीए खाद की अधिक आवश्यकता हो रही है। जिससे किसानों को खाद नहीं मिलने की परेशानी हो रही है। कई खेतों में बुवाई के बाद रेलणी भी की जा रही है। किसान बुवाई के साथ ही गेहंू व सरसों, चना, मसूर, अलसी आदि फसलों की बुवाई केस साथ ही डीएपी की जरुरत पड़ रही है, लेकिन जिले में 4 हजार एमटी के मुकाबल मात्र 450 एमटी की डीएपी खाद आया है। ऐसे में किसानों को बुवाई के समय डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

समय पर उपलब्ध हो खाद-

गत कई वर्षों से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पाता है। सहकारी समितियों में यह समस्या प्रति वर्ष की रहती है। ऐसे में किसानों को समय पर खाद के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। अधिक रुपए देकर खाद लेना पड़ रहा है। जिले में डीएपी खाद कहीं भी नहीं मिल रहा है। कृषि विभाग व जिले के जनप्रतिनिधियों को पहल कर पर्याप्त खाद मंगवाना चाहिए।

राधेश्याम गुर्जर, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ, झालावाड़।

30 फीसदी कमी तो है-

जिले में 20 से 30 फीसदी डीएपी खाद की कमी है, इसके विकल्प के रुप में एनपीके व एसएसपी दे रहे हैं। किसान गोष्ठी के माध्यम से किसानों को डीएपी के विकल्प के रुप में बता चुके हैं। डीएपी की मांग भेज रखी है।

केसी मीणा,संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार, झालावाड़।