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सर्दी बढ़ी, धनिया बीमार

छाछ्या और बांकडिय़ा की गिरफ्त में

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Shailendra Tiwari

Jan 03, 2017

सर्दी बढऩे व तापमान में कमी आने तथा कोहरा बढऩे से धनिए में छाछ्या व बांकडिय़ा रोग नजर आने लगे हैं। दो दिन की गलन में ही 15 से 20 फीसदी धनिया बीमार हो गया है। किसानों ने बड़े अरमान से मसाला फसल धनिये की बुवाई की है। लेकिन इस बार भी सर्दी के अचानक दस्तक देते ही धनिये में रोगग्रस्त होने लगा है।

किसानों की चिंता बढ़ गई है। पिड़ावा, भवानीमंडी, बकानी, असनावर, झालरापाटन आदि में धनिया ज्यादा प्रभावित है। जिले में इस वर्ष धनिये की 83 हजार 750 हैक्टेयर में बुवाई है। वहीं गत वर्ष 87 हजार 900 हैक्टेयर बुवाई थी।

गतवर्ष के मुकाबले कम हुई बुवाई

जिले में गतवर्ष के मुकाबले इस वर्ष 4 हजार हैक्टेयर में कम बुवाई हुई है। गत वर्ष धनिए में करीब 50-60 फीसदी नुकसान होने से इसबार किसानों ने दहलन व लहसुन की ओर रुख किया है। चने का रकबा गतवर्ष 18 हजार हैक्टेयर था वहीं इस वर्ष 35 हजार,लहसुन का गतवर्ष 14 हजार 685 था, इसवर्ष 29 हजार 430 है।

धनिए में रोग

रटलाई. मौसम में उतर-चढ़ाव के चलते कई फसलों में रोग लगने लग गए है। जिसमें सबसे नाजूक फसल धनिएं की मानी जाती है । किसानों ने बताया कि मौसम में गर्मी व अचानक सर्दी का असर होने से धनिए की फसल पर सबसे ज्यादा रोगों का प्रभाव दिखाई देने लगा है धनिएं में इस समय कहीं पर छाछ्या,बांकडिय़ा रोग लगने लगे है,जो धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाता हैं।

जानकारों का कहना है कि लगातार मौसम इस तरह का रहने से फूल के बाद धनिए में लोंगिया रोग हो जाता है । किसान इस प्रकार से धनिएं की फसल में रोग लगने से परेशान है उचित मादर्शन के अभाव में सही दवाईयों का प्रयोग नहीं कर पाते हैं।

ये सर्दी का असर

सर्दी के मौसम में जब तापमान बहुत कम हो जाता है तो धनिए में ओस की बूंदें जम की बर्फनुमा हो जाती हैं। इसे ही पाला कहा जाता है। इसमें पौधे की ग्रोथ ठप हो जाती है। गुणवत्ता बिगड़ जाती है।

पाला पडऩे की संभावना हो तो सिंचाई करें तथा आधी रात के बाद खेत के चारों ओर कुड़ा-करकट जलाकर धुआं कर देना चाहिए। पचास फीसदी फूल आने की अवस्था में 10-15 दिन के अंतराल पर फिर से 1.4 किलो घुलनशील गंधक का छिड़काव करें लगातार सर्र्दी व कोहरे का प्रकोप ज्यादा दिन रहा तो धनिएं में बांकडिय़ा रोग बढऩे की संभावना है।

बद्रीलाल लोधा किसान,रटलाई

तापमान में कमी आई है तो कहीं-कहीं आंशिक रोग हो सकते हैं। इसके लिए किसान कृषि पर्यवेक्षक से सलाह लेकर दवाइयों का स्प्रे करें।

कैलाश चन्द मीणा, उपनिदेशक कृषि विस्तार, झालावाड़

धनिए में बांकडिय़ा रोग लग रहा है। गंधक का स्प्रे कर रहे हैं।

मांगीलाल किसान, किसान धतुरियां

मौसम में नमी होने से पाला पढऩे की संभावना रहती है। इसके लिए किसान 1.5 किलो प्रति हैक्टेयर घुलनशील गंधक का छिड़काव करें या गंधक का चूर्ण 20-25 किलो प्रति हैक्टेयर के हिसाब से फेंकें।

अर्जुन कुमार वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र, झालावाड़