
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कानाफूसी करते हुए। (फोटो: पत्रिका)
Trump-Sharif Secret: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर अजीब नजारा देख कर हर कोई हैरान रह गया, जब 'बोर्ड ऑफ पीस' (Trump Board of Peace Davos) के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिल्कुल बगल वाली कुर्सी पर बैठ कर उनसे गुपचुप बातें करते हुए (Shahbaz Sharif whispering to Trump) नजर आए। वायरल हो रही तस्वीर (Davos WEF Viral Photo) में दोनों नेता एक-दूसरे के बहुत करीब हैं और शहबाज शरीफ ट्रंप के कान में कुछ कानाफूसी करते हुए दिख रहे हैं। जहां भारत इस मंच पर मौजूद नहीं था (India absent from Trump Peace Board), वहीं पाकिस्तान की यह 'नजदीकी' कई अनसुलझे सवाल छोड़ गई है।
कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर कयासों का बाजार गर्म है कि आखिर शहबाज ने ट्रंप के इतने करीब जा कर क्या कहा होगा। सूत्रों और जानकारों के अनुसार, इसके तीन मुख्य मतलब हो सकते हैं:
कंगाली के कगार पर खड़ा पाकिस्तान हमेशा से अमेरिका से 'बेलआउट पैकेज' और निवेश की उम्मीद रखता है। शहबाज ने ट्रंप को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की होगी कि पाकिस्तान उनके 'बोर्ड ऑफ पीस' के लिए सबसे भरोसेमंद पार्टनर साबित हो सकता है।
पाकिस्तान का पुराना इतिहास रहा है कि वह हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ जहर उगलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहबाज शरीफ ने ट्रंप को इस बोर्ड में भारत की 'अनुपस्थिति' का हवाला देते हुए खुद को अमेरिका का बेहतर 'दोस्त' साबित करने की कोशिश की होगी।
ट्रंप के लिए अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी हमेशा एक बड़ा मुद्दा रही है। मुमकिन है कि शहबाज ने क्षेत्र की सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर ट्रंप को कोई 'सीक्रेट' इनपुट दिया हो।
जब ट्रंप मंच पर 'शांति का नया चार्टर' पेश कर रहे थे, तब मंच पर पाकिस्तान, तुर्की और अर्जेंटीना के नेता मौजूद थे, लेकिन भारत की कुर्सी खाली थी। शहबाज शरीफ का ट्रंप के इतना करीब होना भारत के लिए एक कूटनीतिक 'रैड सिग्नल' की तरह है। यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन में पाकिस्तान एक बार फिर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है, जो भारत के हितों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत के पूर्व राजनयिकों का मानना है कि ट्रंप लेनदेन (Transactional) वाली राजनीति करते हैं। शहबाज शरीफ का उनके पास बैठना केवल एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह खुद को दक्षिण एशिया में अमेरिका का मुख्य मोहरा साबित करना चाहता है। हालांकि, भारत की अनुपस्थिति उसकी "रणनीतिक स्वायत्तता" (Strategic Autonomy) का हिस्सा है, जिसे ट्रंप की टीम शायद दबाव के रूप में देख रही है।
विशेषज्ञों ने दोनों नेताओं की 'बॉडी लैंग्वेज' का भी विश्लेषण किया है। शहबाज शरीफ का आगे झुक कर ट्रंप के करीब जाना उनकी 'बेचैनी' और 'जरूरत' दर्शाता है, जबकि ट्रंप का उन्हें ध्यान से सुनना यह संकेत देता है कि ट्रंप इस बार दक्षिण एशिया के समीकरणों में पाकिस्तान को नजरअंदाज नहीं करना चाहते।
बहरहाल, आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस 'कानाफूसी' के बदले पाकिस्तान को कोई बड़ा वित्तीय पैकेज या रक्षा सौदा मिलता है या केवल भारत के खिलाफ कान भरे हैं। वहीं, भारत सरकार पर अब यह दबाव होगा कि वह ट्रंप के साथ अपने रिश्ते फिर से परिभाषित करे, ताकि पाकिस्तान इस नई नजदीकी का फायदा उठा कर भारत विरोधी एजेंडा न चला सके।
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Updated on:
22 Jan 2026 07:44 pm
Published on:
22 Jan 2026 07:39 pm
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