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Rajasthan HC: पीड़ित की तस्वीरें देखकर कोर्ट ने कहा- यह जानवरों जैसा सुलूक, प्रतापगढ़ के SHO को हटाने का आदेश

जोधपुर में हाईकोर्ट ने प्रतापगढ़ के एक पुलिस अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर सख्ती दिखाई है। न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से अधिकारी को दायित्वों से अलग कर सभी साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रतापगढ़ में नियुक्त एक पुलिस अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए उसे तत्काल प्रभाव से पुलिस सर्किल के किसी भी कार्य से दूर रखने के आदेश दिए हैं। साथ ही उसे जांच में हस्तक्षेप करने, गवाहों या परिवादी से संपर्क करने और केस से जुड़े किसी भी दस्तावेज या साक्ष्य को छूने से रोक दिया गया है।

जबरन घर में घुसने का आरोप

न्यायाधीश फरजंद अली की एकल पीठ में याचिकाकर्ता शाकिर शेख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेंद्र सिंह दासपा व अधिवक्ता रॉबिन सिंह ने कहा कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी 2026 की रात आरोपी जबरन घर में घुसे, पीड़ित के पिता और एक अन्य व्यक्ति पर हमला किया, लूटपाट की और बाद में साक्ष्य गढ़ने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि पीड़ित को चार साल पुराने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में झूठी बरामदगी दिखाकर फंसाने का प्रयास किया गया। न्यायाधीश ने युवक के शरीर पर चोटों की तस्वीरें देखकर इसे प्रथम दृष्टया 'जानवरों जैसा सुलूक' और 'कस्टोडियल टॉर्चर' माना।

सभी साक्ष्यों के संरक्षण के निर्देश

कोर्ट ने निचली अदालत के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेशों को दोहराते हुए पुलिस अधीक्षक को मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सभी साक्ष्यों के संरक्षण के निर्देश दिए हैं। आईजी रेंज को भी मामले की निगरानी करने को कहा गया है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक स्वयं निगरानी करेंगे कि कोई साक्ष्य नष्ट या प्रभावित न हो और संबंधित अधिकारी गुलाबसिंह केस डायरी सहित किसी भी रिकॉर्ड तक न पहुंचे।

अगली सुनवाई 23 जनवरी को

उन्होंने कहा कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो पुलिस अधीक्षक को यह बताना होगा कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई को सौंपी जाए या नहीं। पीठ ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को केस डायरी के साथ अगली सुनवाई पर पेश होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी।

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