
Women's Day Special: Politics and administrative reins of the district are in the hands of women.
झालावाड़. आज समाज में महिलाओं का विशेष दर्जा है। महिला घर संभालने के साथ-साथ राजनीति व प्रशासनिक क्षेत्रों में कई उच्च पदों पर अपने दायित्व निभा रही है। बड़ी से बड़ी मुश्किलों का सामना कर महिलाएं, पुरुषों के मुकाबलें आगे निकल रही है। अगर देखा जाए तो आज देश में चाहे राजनीतिक पद हो, या उच्चाधिकारी हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना कर्तव्य निभा रही है। पहले महिलाएं चौका चूल्हा संभालने तक ही सीमित थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जिले में कई अधिकारी व महिला जनप्रतिनिधि है जो अपनी ड्यूटी के साथ-साथ घर परिवार का ध्यान रख रही है। यह महिला अधिकारी व जनप्रतिनिधि जिले के लिए मिसाल है कि महिलाएं किसी से कम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं से राजस्थान पत्रिका की हुई बातचीत.....
राजनीति में इन्होंने गाढ़ झंडे-
वसुन्धरा राजे: राजे राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री व पांच बार सांसद व वर्तमान में विधायक है। राजे ने राज्य व केन्द्र की राजनीति में अहम भूमिका निभाई है। महिला शक्तिकरण में राजे की अहम भूमिका रही है। प्रदेश में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए राजे ने अपने मुख्यमंत्री काल में कई अहम फैसले लेकर प्रदेश को शीर्ष स्थान पर पहुंचाया है। इसी की बदौलत राजे को कई पुरस्कार भी मिले हैं।
जिला प्रमुख: प्रेमबाई-
जिले के देहात से आने वाली गुराडिया निवासी प्रेमबाई दांगी पहली बार जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ी और जिला प्रमुख बनी है। महिला शक्तिकरण में दांगी अहम भूमिका है।वर्तमान में दांगी जिला परिषद की बैठकों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देती नजर आती है। राजीविका समूह के माध्यम से महिलाओं को लोन करवाने में अहम भूमिका है। दंागी १७ दिसंबर २०२० को प्रमुख बनी।
गांव की राजनीती में इन्होने जमाई धाक-
झालरापाटन प्रधान : भावना झाला- भावना झाला पहली बार पंचायत समिति का चुनाव लड़ी और झालरापाटन पंचायत समिति से प्रधान बनी। महिला दिवस पर झाला का कहना है कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। महिलाएं हर वो काम कर सकती है जो पुरूष करता है। झाला ने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देकर ही हम समाज को सशक्त बना सकते हैं।
खानपुर प्रधान: शीला कुमारी जोलपा पंचायत के भंवरा गांव निवासी शीला कुमारी शर्मा पहली बार खानपुर पंचायत समिति की प्रधान बनी है। शर्मा हर बैठक में भाग लेती है अपने क्षेत्र में काम करवाने के लिए जानी जाती है। महिला दिवस पर कहा कि महिलाएं भी पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। इससे हमारा देश प्रगति कर रहा।
पिड़ावा प्रधान: सीता कुमारी भील-
पिड़ावा पंचायत समिति के छोटे से गांव बोलिया बुजुर्ग की रहने वाली प्रधान सीता बाई भी पहली बार प्रधान बनी है। ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश की है। महिलाओं व स्कूली बालिकाओं को हर क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। बेटों की तरह बेटियों को पढ़ाई। हमारी मुख्यमंत्री भी पहले एक महिला रही है।
अकलेरा प्रधान: टीना नामदेव अकलेरा पंचायत समिति की प्रधान टीना नामदेव पहली बार प्रधान बनी है। ग्रामीण क्षेत्र से आने के बादि भी नामदेव हर कार्यक्रम में भाग लेती है। नामदेव ने महिला दिवस पर सभी को बधाई देते हुए बालिकाओं को उच्च शिक्षा तक पढ़ाने की अपील की।
मनोहरथाना प्रधान: रामकन्या तंवर
क्षेत्र के खानपुरिया निवासी रामकन्या तंवर पहली बार प्रधान बनी है। समाज के कार्यक्रम व प्रशानिक बैठकों में जाती है। मनोहरथाना क्षेत्र पिछड़ा क्षेत्र है यहां से लोग रोजगार के लिए पलायन करती है, महिला दिवस पर यही कहना है, कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार से जोड़ा जाएं।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही कौशल्या बाई-
पिड़ावा नगर पालिका अध्यक्ष कौशल्या बाई पाटीदार पिछले तीन साल से महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। वैसे तो ये ग्रामीण क्षेत्र से होने के बावजूद पिड़ावा नगर पालिका की अध्यक्ष रहकर महिलाओं के लिए काम कर रही है। वे प्रधानमंत्री के शक्ति वंदन कार्यक्रम के द्वारा स्वयं सहायता समूह आदि से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
ये अधिकारी अच्छे से चला रही घर- ऑफिस
घर में बेटों को भी बेटियों की तरह दे संस्कार-
तोमर यूपी के बागपत जिले के छोटे गांव जिवानी की रहने वाली लड़की विकट हालात में आईपीएस बनी है। महिला दिवस पर पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर ने कहा कि बेटों को भी बेटियों की तरह संस्कार दें,ताकि वह हर महिला व बेटी को उसी नजर से देखें। तोमर ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कहा अभिभावक बालिकाओं को अच्छी शिक्षा दें ताकि देश में महिला शक्तिकरण स्वत: होगा। समाज में हर फसल महिला के पीछे एक पुरूष का हाथ होता है मेरे यहां तक के सफर में पहले पिता राजेन्द्र पाल का व शादी के बाद पति आईपीएस पति रजनीश का हाथ है।
महिला कोमल है लेकिन, कमजोर नहीं-
झालावाड़ कोतवाली थाने की सीआई चन्द्र ज्योति शर्मा ने महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि महिला कोमल है, लेकिन कमजोर नहीं है। महिलाएं हर क्षेत्र में आज पुरूषों के साथ है। महिलाओं को दूसरे स्थान पर नहीं आंकना चाहिए। बालिकाओं को संस्कार के साथ-साथ अच्छी शिक्षा दें ताकि वो स्वयं आत्मनिर्भर बन सकें।
हर क्षेत्र में महिलाएं नई कहानी रच रही-
कर्मचारी चयन आयोग की सदस्य डॉ. सज्जन पोसवाल ने महिला दिवस पर कहा कि प्रकृति ने स्त्री को रचनात्मकता और संवेदना के उपहार दिए हैं। उन्ही पर सृष्टि टिकी है। उसके इन और अन्य कई गुणों को समाज द्वारा स्वीकार करने और उत्सव के रूप में मनाने का दिन ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। जीवन के हर क्षेत्र में महिलाएं उपलब्धियां और सार्थकता की नई कहानी रच रही है। अब मतदाता के रूप में भी उन्हें एक अलग इकाई के रूप में निर्णायक माना जाने लगा है आने वाले समय में उसकी विविध आयामी भूमिका को स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
हर बैठक में अहम भूमिका-
जनसंपर्क अधिकारी अनुप्रिया ने कहा कि महिलाओं के लिए हर दिन महिला दिवस होता है।बालिकाएं पढ़लिखकर अपने दम पर आत्मनिर्भर बने। एक बालिका पढ़ती है तो दो परिवारों को साक्षर व करती है व उनमें सामाजिक सामंजस्य बिठाती है। अनुप्रिया जनसंपर्क अधिकारी के रूप में सरकार व प्रशासन की अहम कड़ी के रुप में काम करती है।
Published on:
08 Mar 2024 02:00 pm
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