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झांसी में कृषि क्रांति: दलहनी फसलों की बुआई में नए रिकॉर्ड, बड़ी यूरिया सप्लाई

झांसी में कृषि विभाग ने दलहनी फसलों, जैसे कि चना, मटर, और मसूर, की बुआई के लिए 2,39,913 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा था। इसके परिणामस्वरूप, इस लक्ष्य का 97% पूरा हो चुका है, जिससे किसानों को उच्च उत्पादकता का अनुभव हो रहा है।

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Farmer in the field in Jhansi

खेत में खाद का छिड़काव करते इस किसान की तस्वीर को सोशल मीडिया से लिया गया है।

कृषि विभाग ने तय किए गए 2,39,913 हेक्टेयर के लक्ष्य को पूरा करने में सफलता प्राप्त की है, जिसमें चना, मटर, और मसूर समेत दलहनी फसलों को बोने जाने का उद्देश्य था। इस समय, 2,33,951 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी है। बुआई की प्रक्रिया में सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण कारक यह भी है कि उर्वरक सप्लाई सही हो। इस समय, जिले में यूरिया की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, जिससे किसानों को अधिक लाभ हो सकता है। सहकारिता और निजी स्रोतों से मिलाकर कुल 17,033 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध थी, जिसमें से 15,080 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है, और 9,870 मीट्रिक टन स्टॉक में उपलब्ध है।

हरित रूप से बढ़ती दलहनी फसलों की बुआई
दलहनी फसलों की बुआई में वृद्धि का आंकड़ा विचारनीय है। वर्तमान में, लगभग 90 प्रतिशत खेतों में बोई गई फसलों की बुआई हो चुकी है, जो खेती से जुड़े किसानों के लिए एक बड़ी सफलता है। हालांकि, इसमें से सबसे अधिक 98 प्रतिशत खेतों में बोई गई दलहनी फसलों का होना आत्मा में गर्वित होने के लायक है।

खेती विभाग की योजना और उद्देश्य
कृषि विभाग ने दलहनी फसलों की बुआई को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनाई हैं। इसके साथ ही, चना, मटर, और मसूर जैसी फसलों के लिए 2,39,913 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 2,33,951 हेक्टेयर में बोई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि किसान नहीं सिर्फ अपनी फसल की बुआई में सक्षम हैं, बल्कि वे स्वयं को विभिन्न फसलों के साथ भी संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी से संपन्न कर रहे हैं।

विभिन्न फसलों की बुआई में वृद्धि
गेहूं और जौ जैसी खाद्यान्न की बुआई का लक्ष्य 1,45,720 हेक्टेयर था, जिसमें से किसानों ने अब तक 88 हजार हेक्टेयर में बुआई कर ली है। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्यान्न के क्षेत्र में भी बुआई की वृद्धि हुई है और उच्च उत्पादकता की संकेत मिल रही है।

यूरिया की उपलब्धता और योजनाएं
दलहनी फसलों की बुआई में सफलता प्राप्त करने के लिए यूरिया की उपलब्धता का विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस समय, जिले में यूरिया पर्याप्त मात्रा में है और सहकारिता और निजी मिलाकर कुल 17,033 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। इसके साथ ही, देखा गया है कि किसानों को यूरिया की और भी जरूरत है और जिले में 41,985 मीट्रिक टन यूरिया वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 15,080 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है, जबकि 9,870 मीट्रिक टन स्टॉक में रखी है।

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