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मेयर की बड़ी लापरवाही: 4 महीने में नहीं मिला आधे घंटे का समय, डेवलपमेंट के 17 करोड़ फंसे

Jhansi News: झांसी में मेयर की लापरवाही के चलते खजाने में विकास पर खर्च होने वाले 17 करोड़ रुपए फंस गए हैं। उनके पास 4 महीने में 30 मिनट का समय नहीं था। अब 15वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त भी नगर निगम को मिल गई है। मालूम हो कि महापौर की अध्यक्षता में कमेटी की स्वीकृति के बाद ही धनराशि खर्च की जाएगी।

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झांसी मेयर बिहारी लाल आर्य की फोटो सोशल मीडिया से ली गई है।

Jhansi News: महानगर के गली- मोहल्लों में नाला- नाली और सड़क जैसे विकास कार्य कराने के लिए शासन द्वारा 15वें आयोग से दी गई लगभग 17 करोड़ रुपये की धनराशि नगर निगम के खजाने में रखी है, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह धनराशि तभी खर्च हो सकेगी, जब महापौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी इस पर स्वीकृति प्रदान करेगी। जानकर आश्चर्य होगा कि 4 माह में महापौर इसकी बैठक के लिए 30 मिनट का समय नहीं निकाल पाए।


4 महीने पहले आ चुकी है धन राशि

नगर निगम स्ववित्त पोषित संस्था है। इसे अपने अधिकांश खर्च अपनी कमाई से चलाने पड़ते हैं। विभाग की सबसे अधिक आय गृहकर वसूली से होती है, जबकि सरकार द्वारा भी कुछ अनुदान दिया जाता है। 15वें वित्त आयोग से नगर निगम को बड़ी धनराशि मिलती है, जिसे शहरी विकास पर खर्च किया जाता है। यह धनराशि तभी नगर निगम के खजाने से निकाली जा सकती है, जब महापौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी इसकी स्वीकृति प्रदान कर दे। नगर निगम के खजाने में 4 महीने से यह धनराशि आ चुकी है, लेकिन महापौर बिहारी लाल आर्य की अध्यक्षता में बैठक आयोजित नहीं हो पा रही है, जिसका असर महानगर के विकास पर पड़ रहा है। बताया गया है कि पहले मई माह में शासन ने 15वें वित्त आयोग से 8.60 करोड़ रुपए की धनराशि नगर निगम को मिली थी। इसके बाद अगस्त माह में दूसरी किस्त के 8.61 करोड़ रुपए की धनराशि भी नगर निगम को प्राप्त हो गई, लेकिन इसे खर्च नहीं किया जा पा रहा है।


3 सप्ताह पहले तय हो गई थी बैठक, नहीं आए थे महापौर

15वें वित्त आयोग से मई माह में मिली 8.60 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च करने की स्वीकृति के लिए लगभग 3 सप्ताह पहले नगर निगम ने बैठक की तारीख तय कर ली थी। शाम को बैठक से ठीक पहले महापौर ने आने में असमर्थता जता दी, जिसके बाद बैठक निरस्त कर दी गई। इसके बाद दूसरी किश्त के भी 8.61 करोड़ रुपए मिल गए, जिससे दोनों किश्त के 17.21 करोड़ रुपए खजाने में रखे हैं।


जलभराव से जूझता रहा महानगर, खजाने में पड़ा रहा पैसा

बारिश में महानगर की कई निचली बस्तियां जलभराव से जूझती रही। पर, नगर निगम वह प्रयास नहीं कर पाया, जो हो सकते थे। यह स्थिति तब रही, जब नगर निगम के खजाने में 17 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि पड़ी रही। कहा जाता है कि यदि महापौर इसकी स्वीकृति प्रदान कर देते तो जलभराव रोकने के कुछ और उपाय किए जा सकते थे।


15वें वित्त आयोग की धनराशि प्राप्त हो चुकी

नगर निगम के मुख्य अभियंता एसके सिंह ने जानकारी देते हुए बताया है कि 15वें वित्त आयोग की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। जल्द बैठक आयोजित कर इसकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। इसके बाद महानगर में विकास कार्यों को गति दी जाएगी।

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