
बुंदेलखंड की चांदी की मछली से होती है दिवाली की घर-घर पूजा।
Dhanteras 2023: दीपावली का त्योहार सुख और समृद्धि के अलावा भाईचारे के लिए मनाया जाता है। हिंदू धर्म में विश्वास करने वाले इस उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। वहीं, साधक रात में तंत्र साधना भी करते हैं। ऐसे में चांदी की मछली को बड़ा शुभ माना जाता है। क्योंकि यह समृद्धि का प्रतीक है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग हमीरपुर के मौदहा में होती है। यहां के रहने वाले एक परिवार के बुजुर्ग ने चांदी की मछली को महारानी विक्टोरिया को भेंट किया था। जिसके बदले उन्हें सम्मान स्वरूप मेडल मिला था। इस बात का जिक्र ‘आइने-अकबरी’ में भी दर्ज है।
घर-घर होती है पूजा
यूपी के बुंदेलखंड के 7 जनपद और एमपी के हिस्से में पड़ने वाले 7 जनपद यानी कि पूरे 14 जनपदों में दिवाली आते ही चांदी की मछली की मांग बढ़ जाती है। कुशल कारीगरों द्वारा तरासी गई ये मछली असल चांदी की मछली की तरह दिखती है। लोग अपनी छमता के अनुसार छोटी और बड़ी मछली खरीदते हैं। हमीरपुर की बनी इस मछली की डिमांड बुंदेलखंड के अलावा प्रदेश और देश के कई हिस्सों में होती है।
मछली की नक्काशी देख खुश हो गईं थी विक्टोरिया
हमीरपुर के मौदहा के रहने वाले इस परिवार ने जब महारानी विक्टोरिया को मछली भेंट की तो वे हाथ की कारीगरी देख बहुत खुश हुई। सुंदर नक्काशी वाली मछली भेंट में लेने के बाद उन्होंने परिवार के मुखिया को एक मेडल दिया था। उसी समय परिवार का नाम आइने-अकबरी उपन्यास में दर्ज हो गया था।
ड्राइंग रूम से लेकर सूट तक की बढ़ा रही शोभा
बुंदेलखंड की बनी मछली अलग-अलग काम में इस्तेमाल हो रही है। कोई अपने सूट में लगाकर स्मार्ट दिख रहा है, तो कोई ड्राइंग रूम की शोभा बड़ा रहा है।
Published on:
09 Nov 2023 04:46 pm

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