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Jhansi News: दादा रहे फौजी अफसर, मां-बाप टीचर, 13 साल के बटे ने ली डॉन बनने की ट्रेनिंग

Jhansi News: एक 13 साल के बच्चे ने दुर्लभ कश्यप गैंग से बंदूक चलाने की ट्रेनिंग ली। उसका सपना डॉन बनने का था। जबकि उसके दादा आर्मी के ऑफीसर रह चुके हैं। मां-बाप अभी टीचर हैं।  

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घर का इकलौता बेटा बनना चाहता था डॉन।

Jhansi News: महज 13 साल की उम्र में एक अच्छे परिवार के इकलौते बेटे ने डॉन बनने की ट्रेनिंग ले ली। मामला सोचने और समझने वाला है। सोशल मीडिया के इस दौर में बच्चे क्या से क्या बनना चाहते हैं। हम एसे बच्चे का परिचय दे रहे हैं जो देखने में स्मार्ट, बोलने में दबंग, पढ़ने में होशियार, जिसके मन में डॉन बनने की चाहत हुयी। और फिर निकल पड़ा एक ऐसे सफर पर, जहां सिवाय अंधेरे के कुछ हाथ नहीं आता। शूटर्स के साथ रहकर बन्दूक और चाकू चलाना सीखा। अचानक गिरोह का दुर्दान्त सरगना मारा गया तो उसका मन उचट गया और अच्छा नागरिक बनने की चाह लिए अपने घर वापस लौटा, लेकिन चाइल्ड लाइन के हत्थे चढ़ गया।। बाल कल्याण समिति ने उसे अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है।

सोशल मीडिया ने बढ़ाई चाहत

छपरा (बिहार) में रहने वाला यह किशोर सम्पन्न परिवार का है। कक्षा 8वीं में उसने 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। विज्ञान का वह मेधावी छात्र माना जाता है, लेकिन सोशल मीडिया पर चैटिंग के दौरान वर्ष 2019 उसका सम्पर्क उज्जैन के मशहूर गैंग्स्टर दुर्लभ कश्यप से हो गया। लगातार चैटिंग के बाद वह दुर्लभ के कहने पर उज्जैन (मध्य प्रदेश) चला गया। रेलवे स्टेशन पर गैंग्स्टर के गुर्गों ने उसका स्वागत किया। उसे आलीशान हवेली में ठहराया गया। खूब खातिरदारी की गयी । उसे हर तरह की बन्दूक और चाकू चलाना सिखाया गया। कुछ दिन की ट्रेनिंग के बाद वह अपने घर वापस लौट गया। इसके बाद वह दो-तीन बार उज्जैन गया और गैंग के साथ रहा।

बदल गया मन

सितम्बर 2020 में गैंग लीडर दुर्लभ कश्यप एक मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद भी यह बालक गैंग के पास गया, लेकिन मन न लगने पर लौट आया। इसी माह गैंग के कुछ सदस्यों ने नए सिरे से गैंग खड़ा करने की बात कहकर उसे उज्जैन बुलाया। किशोर फिर वहां गया, लेकिन दुर्लभ कश्यप की मौत ने उसे खिन्न कर दिया। वह अच्छा नागरिक बनने की सोच लेकर वापस अपने घर लौट रहा था कि झांसी रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड लाइन के हत्थे चढ़ गया। उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां किशोर ने अपने दादा के साथ रहकर खूब पढ़ने और अफसर बनने की इच्छा जतायी। समिति की सदस्य परवीन खान एवं दीप्ती सक्सेना ने बताया कि किशोर के माता- पिता को सूचित कर दिया गया है। उनके कल तक यहां आने की सम्भावना है। यदि वह नहीं आए तो किशोर को अपने पास रखकर अच्छा नागरिक बनाने में मदद करेंगे।

दुर्लभ गैंग में 14 से 17 उम्र के कई सदस्य हैं

उज्जैन के दुर्लभ कश्यप के गैंग में 14 से 17 साल की उम्र के लगभग 700 सदस्य हैं। यह गिरोह सुपारी लेकर किसी की भी हत्या करने से नहीं चूकता। गैंग के सभी सदस्य माथे पर तिलक, आंखों में काजल लगाते हैं। काले कपड़ों के ऊपर सफेद गमछा टांगे रहते हैं । यह काफी कुख्यात गैंग माना जाता था, लेकिन लीडर की मौत के बाद से गैंग कुछ कमजोर हुआ है।

बच्चे की पढ़ाई की उठाई जाएगी जिम्मेंदारी

वहीं, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा का कहना है कि बालक के पिता को सूचित कर दिया गया है। उन्होंने शाम की गाडी से आने को कहा है। अगर दो दिन में वे नहीं आए तो विधिक कार्यवाही करते हुए बालक को अपने साथ रखकर अच्छी तरह से पढ़ाने का जिम्मा उठाएंगे, ताकि वह फिर गलत रास्ते

पर न चल सके।