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अब बुंदेलखंड में आवारा पशुओं के लिए नई योजना, आश्रय के साथ ही मिलेगी भरपूर खुराक

राजस्व ग्रामों के चरागाह भूमि को विकसित करने का खाका खींचा।

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Nirashrit Pashudhan Sanrakshan Vikas Yojana for Anna Pratha in hindi Jhansi Bundelkhand News

अब बुंदेलखंड में आवारा पशुओं के लिए नई योजना, आश्रय के साथ ही मिलेगी भरपूर खुराक

झांसी. बुंदेलखंड में व्याप्त अन्ना प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय निराश्रित पशुधन संरक्षण एवं विकास योजना लांच की गई है जो न केवल पशुओं का संरक्षण करेगी बल्कि उन्हें चारा-पानी देकर पोषित भी किया जाएगा।

लगातार छोटी होती जोतों व पशुओं में बांझपन की बढ़ती समस्या के कारण अनेक किसान अपने पशुओं को छोड़ देते हैं। इससे वे आवारा घूमने को मजबूर हो जाते हैं। यही आवारा पशु किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही सड़कों पर अनेकों दुर्घटनाओं के कारण भी बनते हैं। असामाजिक तत्व भी पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं। इस तरह की समस्या को देखते हुए शासन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय निराश्रित पशुधन संरक्षण एवं विकास योजना शुरू करने का फैसला किया है। योजना के तहत ग्राम विकास एवं पशुपालन विभाग को ग्राम पंचायत के माध्यम से राजस्व ग्रामों में स्थित चरागाह की भूमि आरक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पशुपालन विभाग आवश्यक आधारभूत संरचना एवं निवेश के साथ पशुओं को चिकित्सीय सेवाएं देगा जबकि ग्राम विकास विभाग द्वारा चरागाह विकसित करने के लिए मनरेगा के तहत नियमानुसार धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

ऐसी है योजना

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वाईएस तोमर ने बताया कि योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चरागाह के लिए आरक्षित भूमि अथवा पुरानी परती, नवीन परती, बंजर जैसी अन्य शासकीय भूमि को चिह्नित कर आश्रय स्थल हेतु आरक्षित की जाएगी। इस जमीन के चारों तरफ मनरेगा से तीन मीटर गहरी व दो मीटर चौड़ी जल संरक्षण खाई बनाई जाएगी तथा इसमें से निकली मिट्टी से आश्रय स्थल की मेड़बंदी की जाएगी ताकि वहां अतिक्रमण न किया जा सके। खाई स्थायी सीमारेखा का काम करेगी ताकि बाहरी व्यक्ति या पशु वहां प्रवेश न कर सकें। पशुओं के आवागमन के लिए एक दरवाजा रहेगा। इस जमीन पर पौष्टिक चारा उगाया जाएगा तथा सिंचाई के लिए सार्वजनिक राजकीय नलकूप का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि चरागाह के एक कोने में तालाब का निर्माण भी कराया जा सकता है जिससे पशुओं को पीने के पानी उपलब्ध हो सके एवं चरागाह को सिंचित किया जा सके। चरागाह में पशुओं की छाया के लिए टीनशेड भी लगाए जाएंगे।

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