दरअसल, 19 नवंबर को राष्ट्रीय रक्षा पर्व के समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जनरल बिपिन रावत भी इस मैदान में मौजूद थे। उन्होंने झांसी और महारानी लक्ष्मीबाई की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने रानी के सम्मान में कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी…’ की कुछ पंक्तियां भी सुनाई थीं। झांसी किले की तलहटी में स्थित यह मैदान कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई जब किले से अपने घोड़े पर बैठकर कूदी थीं तो वह इसी मैदान से होकर गुजरी थी। यह मैदान शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। इसके अलावा इस मैदान में कई बड़ी राजनीतिक कार्यक्रम भी हो चुके हैं।