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मां ने लगाई डांट, घर से भागीं 3 लड़कियां, सौदा होने से पहले इन्होंने बचाई जिंदगी

झांसी में घर से भागी तीन नाबालिग लड़कियों की जिंदगी बचाई गई है। मां की डांट सुनकर लड़कियां घर से भाग कर अपनी सहेली के पास जा रहीं थी। बिहार ले जाने की बात कहकर युवक ने उन्हें दूसरी ट्रेन में चढ़ा दिया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर सोशल मीडिया से ली गई है।

मां की डर से अपनी सहेली के साथ घर से भागी 2 सगी नाबालिग बहनें गलत हाथों में फंसने से बच गयी। ट्रेन में मिला एक युवक उन्हें बहलाकर अपने साथ बिहार ले जाने की बात कह कर दूसरी ट्रेन में चढ़ा लिया। रास्ते में उसकी मंशा भांपकर तीनों लड़कियां झांसी रेलवे स्टेशन पर उतर गयीं। यहां बाल कल्याण समिति ने उन्हें उनके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया। लुधियाना (पंजाब) में रहने वाली 2 नाबालिग बहनें अपनी मां के हाथों होने वाली आए दिन की मारपीट से तंग आकर घर से भाग निकलीं।


युवक करवाना चाहता था सौदा

उनके साथ पड़ोस में रहने वाली एक अन्य बालिका भी हो गयी। तीनों रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां एक ट्रेन में बिना टिकट सवार हो गयीं। सुबह 4 बजे ट्रेन हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंची तो तीनों लड़कियां यहां उतर गई। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लड़कियों के हाव-भाव देखकर एक युवक को शक हुआ। उसने बालिकाओं से पूछताछ की। उनके यह बताने पर कि वह बिहार जा रही हैं, युवक ने उन्हें अपने साथ बिहार ले जाने का आश्वासन देकर समता एक्सप्रेस (हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम ) में बिठा लिया। वो उन लड़कियों के बेचने की फिराक में था।


यात्री का फोन लेकर मां से की बात

ट्रेन के झांसी पहुंचने पर एक लड़की घबरा गई और एक यात्री का मोबाइल फोन लेकर अपनी मां से बात की। मां के समझाने पर तीनों लड़कियां झांसी रेलवे स्टेशन पर उतर गयीं। यहां वह रेलवे चाइल्ड लाइन के हत्थे चढ़ गयीं, जहां से उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति अध्यक्ष राजीव शर्मा, सदस्य परवीन खान एवं हरिकृष्ण सक्सेना ने उनकी काउंसलिंग करते हुए उनके परिवार वालों से बात की। परिवार वालों को भविष्य में बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार न करने की चेतावनी देकर उन्हें उनकी मां की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है।

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