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बच्चों के लिए सितंबर का महीना है विशेष, हर दिन का होगा खास मकसद

इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘कॉम्पलीमेंट्री फीडिंग’ यानी पूरक आहार रखी गयी है।

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special drive for malnutrition child

बच्चों के लिए सितंबर का महीना है विशेष, हर दिन का होगा खास मकसद

झांसी। कुपोषण मुक्त, स्वस्थ और मजबूत भारत के निर्माण के उद्देश्य से सितम्बर को पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा। इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘कॉम्पलीमेंट्री फीडिंग’ यानी पूरक आहार रखी गयी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के हिसाब से जनपद में स्तनपान करने वाले 6-23 माह के 10.9 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त पूरक आहार मिलता है।

बहुत अहम है पहले एक हजार दिन

राज्य पोषण मिशन की महानिदेशक मोनिका एस. गर्ग ने सूबे के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को पत्र भेजकर पोषण माह मनाने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनके जीवन के पहले एक हजार दिन बड़े अहम होते हैं। बच्चों में कुपोषण की व्यापकता छह माह से दो वर्ष के मध्य तेजी से बढ़ती है। दरअसल छह माह के बाद बच्चे को सही पोषण के लिए मां के दूध के अलावा पूरक आहार की भी जरूरत होती है। इस दौरान शिशु को डायरिया और निमोनिया का खतरा अधिक होता है। ऐसे में बच्चा सुपोषित होगा तो उसकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी। इसके साथ पूरक आहार के संबंध में एक गाइड लाइन भी निदेशालय से भेजी गई है। इस गाइड लाइन की मदद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों की माताओं को पूरक आहार के संबंध में समझाएंगी।

ये है कार्यक्रमों की रूपरेखा

जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रमों की रूप रेखा बना ली गई है और एक सितम्बर से इनके ऊपर कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा शुक्रवार पोषण समिति/कंवर्जेस समिति की बैठक में खंड विकास अधिकारी को पोषण माह की गतिविधियों के आयोजन का नोडल अधिकारी नामित किया है। वरिष्ठ अधिकारियों को भी पर्यवेक्षण हेतु नामित किया गया है।

पोषण माह में 6 विभाग मिलकर कार्य करेंगे। इसमें महिला व बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पेयजल व स्वच्छता एवं उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग आदि सम्मिलित हैं।

यूनिसेफ़ के डिवीज़नल रिसोर्स पर्सन संजय कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में पोषण से संबन्धित अंकित आंकड़ों में 2020 तक बच्चों में कम वजन और बौनेपन में 6 प्रतिशत और बच्चों और महिलाओं में खून की कमी दर में 9 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या कहते है आंकड़े-

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार जनपद में 0 से 5 वर्ष तक के 36॰1 प्रतिशत बच्चे बौनेपन का शिकार है, वही 18.6 प्रतिशत बच्चे कम वजन के है। 6 से 59 माह के 77.8 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है, वही 15 से 49 वर्ष की 55॰1 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है।

आईसीडीएस विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2019 में 0 से 5 वर्ष तक 1.23 लाख से अधिक बच्चों का वजन किया गया था, जिसमें 1.13 लाख से अधिक बच्चे सामान्य श्रेणी में थे। 8500 से अधिक बच्चे पीली श्रेणी यानि कुपोषित थे। वही 1500 से अधिक बच्चे लाल श्रेणी यानि अतिकुपोषित थे।

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